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दूसरे अपराधियो को जिला बदर क्यों नहीं किया-नाहटा

मामला: अनिल सोनी हत्याकांड
मंदसौर। अनिल सोनी को जब जिला बदर किया गया तब दूसरे अपराधियों को क्यो छोड़ दिया गया? पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा ने यह सवाल करते हुए कहा है कि यदि। ऐसा हो जाता तो अनिल सोनी की जान बचाई जा सकती थी।
नाहटा ने कहा कि व्यक्तिगत तौर पर वे यह मानते है कि अनिल सोनी के व्यवसाय को लेकर कुछ आरोप लगाए जाते थे। परंतु उनका जिला बदर आदेश कानून की कसौटी पर खरा नही उतरता। यदि यह कहा जाए कि यह आदेश केवल इस बात की सज़ा थी कि वे जिला प्रशासन के विरुद्ध लड़ रहे थे तो गलत नही होगा। क्या प्रजातन्त्र में बोलना भी अपराध हो गया है। नाहटा ने कहा कि यदि इस सवाल को छोड़ भी दिया जाए तो इसका जवाब तो तात्कालिक अधिकारियों को देना ही होगा कि उस समय ऐसे कितने व्यक्ति थे जिन पर समान अपराध पंजीबद्ध थे और फिर भी उन पर कार्यवाही नही करते हुए केवल अनिल सोनी को चुना गया। इसका जवाब तो जन प्रतिनिधियों को भी देना होगा कि उनने आपत्ति क्यो नही की। मंदसौर की जनता को यह जानने का भी अधिकार है कि अनिल हत्याकांड के जिन आरोपियों पर संदेह है उनके विरुद्ध कितने प्रकरण उस समय पंजीबद्ध थे।
नाहटा ने कहा कि चुन्नू लाला की संपत्ति को लेकर जो आरोप सार्वजनिक रूप से लगाये जा रहे है उनके बारे में आम आदमी प्रारम्भ से जानता था। किसको मालूम नही था कि पेट्रोल पंप की नगर पालिका की भूमि का सौदा बाज़ार में था। किसको पता नही था कि यह सौदा किसने लिया। क्या कारण थे कि नगर पालिका और जन प्रतिनिधि करोड़ो की जनता की इस सम्पत्ति को कुछ निजी हाथों में जाने देने में सहयोगी बन रहे थे। नगर पालिका और जिला प्रशासन को इस बात का जवाब देना होगा कि समाचार पत्रों में दूसरी सम्पत्ति को लेकर लगाए जा रहे आरोप में कितनी सच्चाई है।
यह तथ्य तो प्रमाणित हो गया है कि एलियन को किन का सरंक्षण प्राप्त था। नाहटा ने सभी राजनैतिक दलों और नागरिकों से अनुरोध किया है कि सभी एक जुट होकर कुछ जन प्रतिनिधियों और असमाजिक तत्वों के इस गठबंधन से शहर को बचाये। इसमे ही हमारा हित है।

patallok

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