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कम मतदान से प्रशासन सजग, सतर्क

पालो रिपोर्टर = मंदसौर
18 अप्रैल को संपन्न हुए लोकसभा चुनाव के दूसरे चरण में लाख कोशिशों के बाद भी मतदान प्रतिशत में कमी आई है, यह कमी 2014 के लोकसभा चुनाव के मतदान से 3 फीसदी कम है। जबकि भारत निर्वाचन आयोग ने शत प्रतिशत मतदान करवाने के लिए कमर कसी थी, और प्रचार प्रसार में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी, यहां तक की मतदान का समय भी बढ़ा दिया गया और दिव्यांगों, धात्री महिला, गर्भवती महिला और सीनियर सिटीजन को लाइन में भी नहीं लगना पड़े इसके लिए विशेष इंतजाम भी किए, वहीं कुछ मतदान केंद्रों को मॉडल मतदान केंद्र के रूप में भी प्रस्तुत किया तो कहीं पिंक मतदान केंद्र की बनाएं जहाँ सिर्फ महिला मतदाता के लिए थे वहाँ सभी मतदान कर्मी भी महिलाये लगाई गई।
मॉडल मतदान केंद्रों पर मतदाताओं को बेठने के लिए कुर्सियां उपलब्ध कराई गई, पीने के ठंडे पानी की व्यवस्था की गई, यहां तक कि कहीं कहीं तो बिसलरी भी उपलब्ध करवाई इतनी सब सुविधाओं के बाद भी मतदान में 3प्रतिशत की कमी आ गई। जिससे निर्वाचन आयोग चिंतित है दूसरे चरण के मतदान में 66 फ़ीसदी मतदान हुआ जबकि 2014 में मतदान 69 प्रतिशत था गिरकर 66 पर आ गया। आंकड़ों की बात करें तो उड़ीसा में 2014 में 62 प्रतिशत मतदान हुवा था वह गिरकर 60 प्रतिशत रह गया, उत्तर प्रदेश में 62 प्रतिशत से गिरकर 61 प्रतिशत पर आ गया वहीं महाराष्ट्र में बी 62 से गिरकर 58 प्रतिशत पर पहुंच गया, जम्मू कश्मीर में तो 50 प्रतिशत से गिरकर 43प्रतिशत पर आ गया, वहीं पश्चिमी बंगाल में 81 प्रतिशत गिरकर 76 प्रतिशत पर पहुंच गया, तो असम में 78 प्रतिशत से गिरकर 75प्रतिशत पर आ गया। इस प्रकार से सभी राज्यों के से मिले आंकड़ों के अनुसार 1 पूर्वोत्तर राज्य की सिर्फ 1 सीट पर 1 फीसदी मतदान बड़ा है बाकी पूरे देश में यह मतदान प्रतिशत कहीं कम कहीं ज्यादा गिरा है।
मतदान कम होने का कारण
तेज धूप
उत्तर भारत में और दक्षिण भारत में जहां गर्मी का प्रकोप ज्यादा है वहां पर सुबह और शाम मतदान ज्यादा हुआ जबकि दोपहर को मतदान केंद्र सूने पड़े रहे, कई जगहों पर सुबह- शाम लाइने लगी दिखी, दोपहर को नहीं।
कुछ लौट गए
मतदाता केंद्रों पर लाइने देखकर चले गए, विशेष कर दोपहर के समय कई मतदाता जहां पर छाया की व्यवस्था या बैठने की व्यवस्था नहीं थी वहां पर पहुंचे तो सही किंतु उन्होंने जब लंबी लाइनें देखी तो धूप में खड़े रहने की बजाय बिना मतदान किये अपने घर चले गए।
लोकसभा में कम मतदान
प्राय देखने में आया है विधानसभा और स्थानीय निर्वाचन में मतदान का प्रतिशत अधिक होता है जबकि लोकसभा में मतदान कम होता है, लोकसभा में मतदाताओं की संख्या लगभग 10 से 12 लाख तक हो जाती है जिससे प्रत्याशी सभी मतदाताओं तक नहीं पहुंच पाता है, इस कारण से मतदाताओं की उदासीनता लोकसभा के प्रति ज्यादा होती है, इस कारण भी मतदान कम हुआ।
मत पर्ची का उपयोग
गत चुनाव में बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर के और मतदान के लिए पर्चियां दी गई थी इस बार भी दी गई पर उन पर्चियों के साथ एक पहचान पत्र लाना जरूरी कर दिया, जिससे कई मतदाता मतदान में भाग लेने नहीं पहुंचे, कुछ पहुंचे पर उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था, इस कारण से वह वापस लौट गए।
चुनाव आयोग ने दिए निर्देश
चुनाव आयोग ने सभी राज्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वह अधिक से अधिक प्रचार करें और तीसरे से लगाकर सातवें दौर तक के मतदान में शत प्रतिशत मतदान करवाने के लिए पूरी व्यवस्थाएं जितनी हो सके करें अब देखना है कि निर्वाचन आयोग के आदेश का कितना असर होता है।
इनका कहना
विशेषकर शहरी क्षेत्रों में मतदान कम हो रहा है, और 2014 की बजाय वर्तमान 2019 में तापमान 3 से 4 डिग्री अधिक है ,इससे गर्मी अधिक होने के कारण भी मतदाता मतदान केंद्र तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, हम कोशिश कर रहे हैं कि मतदान केंद्र पर पहुंचने के बाद मतदाताओं को बैठने के लिए छाया की और पानी की पूरी सुविधा हो ताकि कोई मतदाता गर्मी से परेशान नहीं हो, साथ ही मतदाता पर्ची के साथ हो एक पहचान पत्र जरूर ले जाए, इसके लिए बीएलओ को भी हमने निर्देश दिए हैं कि किसी भी प्रकार से मतदाता मतदान से वंचित नहीं रहे हमारी कोशिश है कि मतदान 2014 से अधिक हो।
धनराजू एस
जिला निर्वाचन अधिकारी कलेक्टर, मंदसौर

मतदाता जागरूकता अभियान
मंदसौर। कलेक्टर एवं जिला निर्वाचन अधिकारी के निर्देशन में चल रहे मतदाता जागरूकता अभियान के अन्तर्गत मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए सहायक नोडल अधिकारी स्वीप ज्योति नवहाल वेस्ट मटेरियल से फॉउण्टेन तथा अन्य आकर्षक सामग्री बना रही हैं।

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