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सजा इंद्रगढ़ की महारानी का दरबार

नवरात्रि की पंचमी की रात खिलचीपुरा में मां बिजासन ने दिखाया चमत्कार
खेत में प्रतिष्ठीत प्रतिमा खुद-बा-खुद 200 मीटर दूर जाकर हो गई प्रतिष्ठित, तीन माह पूर्व सपना आने के बाद एक भक्त ने किया था प्रतिष्ठित
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

वैसे तो अवंतिका संभाग के दशपुर जिले ने पौराणिक व पुरातात्विक दृष्टि से पहले ही प्रदेश में अपना एक अलग स्थान बनाया हुआ है, किंतु इस चेत्र नवरात्रि में जिले के चमत्कारों में एक और अध्याय पंचमी की आधी रात उस वक्त जुड़ गया जब जिला मुख्यालय से करीब 5 किमी दूर स्थित ग्राम खिलचीपुरा में प्रतिष्ठित मां बिजासन की प्रतिमा खुद-बा-खुद खेत से करीब 200 मीटर दूर पहाडऩूमा टीले पर जाकर प्रतिष्ठित हो गई। गौरतलब है, कि यह प्रतिमा तीन माह पूर्व एक भक्त ने सपना आने पर खेत में स्थित अपने कुल देवी-देवताओं के पास ही प्रतिष्ठित की थी। अब जैसे-जैसे लोगों को पता चल रहा है दिन-ओ-दिन यहां दर्शनार्थियों का तातां लगने लगा है।
खिलचीपुरा में गांव में इस चेत्र नवरात्रि की पंचमी यानि बुधवार की रात 12.10 बजे जो वाकिया हुआ। उस पर शायद नई व विज्ञान पर विश्वास करने वाली पीड़ी एकाएक विश्वास न करें, लेकिन यह बात भी झूठलाई नहीं जा सकती कि भारत चमत्कारों और पौराणिक महत्वता का देश है। दरअसल कहानी बिती मकर संक्रांति की रात से प्रारंभ हुई, जब खिलचीपुरा निवासी कैलाश पिता नारायण माली को सपने में माता आई और उनने उसे कहा कि मुझे तू स्थापित कर। तब कैलाश ने पूछा कि आप कौन हो तो माता ने जवाब दिया कि मैं इंद्रगढ़ राजस्थान की रहने वाली हूं। एसे में पहले सपने में कैलाश ने बात आई-गई कर दी, लेकिन अगले ही सप्ताह रविवार को पुन: उसे मां बिजासन सपने में आई और यही बात दौहराई। तब कैलाश ने हाथ जोड़कर विनती की कि आप जो भी हैं मुझे परेशान न करें मैं गरीब व्यक्ति हूं और मेरे छोटे-छोटे बच्चे हैं। इसे बाद करीब दो सप्ताह कैलाश को कोई सपना नहीं आया, लेकिन तीसरे ही सप्ताह पुन: माता रानी उसके सपने में आई और कहा कि तुझे मेरी स्थापना तो करना ही होगी। फिर कैलाश ने कुछ जानकारों से राय ली और उपजेल के सामने मुर्ति बनाने वाले के पास गया और सपने में आई मां की कल्पना का स्क्रेच मुर्तिकार को समझाया, जिसके अनुसार एक प्रतिमा बनाई गई। यह प्रतिमा इतनी भारी बनी कि तीन व्यक्ति कम से कम इसे उठाने में चाहिए। बाद में यही प्रतिमा कैलाश ने खिलचीपुरा निवासी शंभुनाथजी के खेत में बैठे अपने भेरू-जूझारजी के साथ बैठा दी। करीब तीन माह तक मां बिजासन यही प्रतिष्ठित रही, लेकिन इस बीच कैलाश को किसी जानकार ने यह भी इशारा किया था कि ये प्रतिमा यहां रूकने वाली नहीं। आखिरकार हुआ भी यही और बुधवार रात उक्त प्रतिमा उठकर खिलचीपुरा स्थित टॉवर के नीचे राजा दशरथ महल के पीछे ज्ञासपुरा रोड से लगे टीले नूमा पहाड़ी पर स्थापित हो गई।
चौकी लगी तो पता चला पूरी घटना
सनातन मान्यता है, कि देवी-देवता इंसानी शरीर में आते हैं और भक्तों की परेशानियां दूर करते हैं, जिसे आम भाषा में चौकी लगाना भी बोलते हैं। भक्त कैलाश माली ने बताया कि वह तो प्रतिमा खेत से गायब होने के बाद यहां-वहां खोज रहा था। तभी किसी ने कहा कि वो प्रतिमा तो उक्त स्थान पर पड़ी है, लेकिन किसी के यह समझ नहीं आया कि प्रतिमा यहां कैसे पहुंची। तब कैलाश सहित कुछ भक्तों ने प्रतिमा यहां से उठाने का प्रयास भी किया, लेकिन प्रतिमा टस से मस नहीं हुई। बाद में माता रानी की चौकी लगाई और मां के भाव आए। तब खुद मां ने ही कहा कि मैं बुधवार रात 12.10 बजे खुद ही यहां आकर स्थापित हो गई हूं।
वाकई इंद्रगढ़ में भी है मां बिजासन
मामले में जब कुछ बुद्धिजीवियों ने अपने तई पड़ताल की तो पता चला कि जिस सपने में माता रानी ने कैलाश को जिस इंद्रगढ़ राजस्थान की रहने वाली हूं कहा था। उसी इंद्रगढ़ के बारे में गुगल पर लिखने पर उक्त बिजासन माता मंदिर का पूरा इतिहास आने लगा, जिससे भी लोगों में विश्वास पैदा हो रहा है, कि इंद्रगढ़ वाली बिजासन मां अब मंदसौर में भी दरबार लगाने पहुंच गई है।
अपने आप मुंह पलटती है प्रतिमा
इसे महज मान्यता समझे या आस्था लेकिन एक चमत्कार इस प्रतिमा का यह भी है, कि यह प्रतिमा हर थोड़ी देर में अपने मुंह की दिशा हल्की-हल्की बदल रही है। रविवार को भी कुछ भक्त जब यहां मां के दर्शन करने पहुंचे तो पहले मां के मुंह की दीशा ठीक सामने थी, लेकिन कुछ देर बाद यही दीशा ज्ञासपुर मार्ग की ओर हो गई। जब इस बात पर खुद भक्तों को विश्वास नहीं हुआ तो उनने पहले आते से ही प्रतिमा के साथ जो सैल्फी लिया था वो निकालकर देखा और प्रतिमा की साक्षात दीशा देखी तो सब के होश उढ़ गए।
भविष्य मेें बनेगा मां बिजासन का भव्य दरबार
फिलहाल तो यहां मंदिर बनने या इसे भव्यता देने की कोई चर्चाएं इतनी प्रबल नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह मां का चमत्कार देख भक्तों की भीड़ बढती ही जा रही है उससे यह अंदाजा लगाया जा सकता है, कि भविष्य में मां बिजासन का भव्य दरबार यहां बन सकता है। हालांकि क्षेत्रवासी मंदिर निर्माण अन्य कार्यों के लिए जल्द ही एक समिति गठित करने वाले हैं। एक और खास बात यह है, कि जिस स्थान पर यह प्रतिमा स्थापित हुई है उस पहाड़ी से मां नालछा का मंदिर पूरा दिखाई दे रहा है। यानि श्रवण नाले के आसपास यह स्थान है। एसे में यदि यहां भव्य मंदिर भविष्य में आकार लेता है तो पशुपतिनाथ, राम मंदिर, द्वारकाधीश मंदिर, नालछा माता मंदिर, धोलागिरी महादेव, कुबेर मंदिर, सूर्य मंदिर, खिड़की माता मंदिर जैसे शहर के बड़े मंदिरों के इस क्षेत्र में एक और भव्य मंदिर हो सकेगा।
पिपलिया वाले को आया छाव करने का स्वप्न
जिस भक्त कैलाश को मां की प्रतिमा स्थापित करने का स्वप्न आया उनके अनुसार मां की प्रतिमा जब यहां आकर स्थापित हो गई तो मां अब की बार पिपलियामंडी निवासी किसी व्यक्ति के सपने में आई और अपने उपर छाव करने के लिए कहा। तब उक्त व्यक्ति पूछता-पूछता खिलचीपुरा स्थित इस स्थान पर पहुंचा और फिलहाल ग्रीन पाल से मां की प्रतिमा के उपर छाव की।

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