NEWS :

क्या मुंबई के अकबर का भी रोल है मामले में…?

मामला: अनिल सोनी हत्या कांड का
सुसनेर के गैलाना से पकड़ाई मुंबई के अकबर की जेगुआर, मंदसौर में सोनी समाज ने फिर दिया ज्ञापन
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

सराफा व्यापारी अनिल सोनी हत्याकांड में तीसरे दिन भी पुलिस किसी नतीजे पर नहीं पहुंची है। दिन-ओ-दिन बाजार में नई-नई कहानियां सुखिर्या बटौर रही है। इसी बीच एक और कहानी आगर मालवा जिले के सुसनेर थाने से निकलकर आ रही है, जहां गैलाना गांव से पुलिस ने मुंबई के थाणे के रहने वाले अकबर ए खान नाम के व्यक्ति की जेगुआर कार लावारिस अवस्था में पकड़ी है। खबरों के अनुसार सोनी हत्याकांड की जांच में सुसनेर पहुंची मंदसौर पुलिस ने सुसनेर पुलिस के साथ नाकाबंदी के दौरान यह कार बरामद की है। हालांकि सुसनेर पुलिस इस दौरान मंदसौर पुलिस की मौजूदगी से इंकार कर रही है। खैर इधर, मंदसौर में सोनी समाज ने एक बार फिर ज्ञापन दिया, तो वहीं कांग्रेसजनों के साथ कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन भी एसपी विवेक अग्रवाल से मिलने पहुंची, तो वहीं मंदसौर पुलिस अपने तई चुन्नू लाला के तमाम ठिकानों पर छापामार कार्रवाई के साथ ही अन्य संदिग्धों से भी लगातार पूछताछ कर रही है।
सुसनेर थाना प्रभारी रंजीत सींगार के अनुसार एसी सूचना मिली थी, कि मंदसौर के अनिल सोनी हत्याकांड के सस्पेक्टेड उनके थाना क्षेत्र से गुजर रहे हैं या शरण ली हुई है। इसके बाद से लगातार हरकत में आई पुलिस ने गैलाना, मोड़ी, नांदना आदि गांवों में नाकाबंदी की। इस दौरान गैलाना की नाकाबंदी को क्रॉस करते हुए एक जेगुआर कार एमएच 03 बीजे 9630 निकली, जिसका पीछा किया गया, तो कार चालक वाहन को ग्राम मोड़ी की ओर भगा ले गया, लेकिन पुलिस बल ने पीछा नहीं छोड़ा। इसी दौरान मोड़ी की ओर भी सामने पुलिस की नाकाबंदी देख चालक पुन: कार को गैलाना की ओर लाया। पुलिस भी पीछा करते हुए यहां पहुंची तो गैलाना सरपंच के घर से कुछ दूर कार लावारिस अवस्था में मिली। बताया जा रहा है, कि कार में करीब 4 लोग सवार थे। पुलिस ने कार की नजरबंदी करते हुए आसपास के क्षेत्र में आरोपियों की तलाश में देर रात तक सर्चिंग की, किंतु कोई हाथ नहीं आया। बाद में पुलिस कार को थाने ले आई और नंबरों के आधार पर डिटेल निकाली तो कार किसी अकबर ए खान निवासी थाणे, मुंबई, महाराष्ट्र के नाम होना बताई जा रही है। अब सुसनेर पुलिस एकाध दिन में अकबर ए खान को तलब करने के मुड़ में आ चुकी है, जिसको बुलवाकर पता किया जाएगा कि कार चोरी हुई, उसी के कुछ लोग सवार थे या क्या कहानी थी। किंतु फिलहाल जिस काम के लिए नाकाबंदी की गई थी और कार सवार कार को लावारिस अवस्था में छोड़कर फरार हुए उससे शक की सुई कार मालिक अकबर ए खान पर भी जा रही है।
एक कहानी पैरोल की
शहर में अनिल सोनी हत्याकांड को लेकर तरह-तरह के कयास और कहानियां इन दिनों जोरों पर चल रही है। इन्हीं कहानियों में एक कहानी यह भी है, कि पिछले दिनों मंदसौर जेल में एक कैदी आया था, जिसे सेंट्रल जेल भेजने के लिए अनिल सोनी ने जेल प्रशासन से मांग की थी। इसकी खबर पहले से उम्र कैद की सजा काट रहे एक कैदी को मिली और उस कैदी ने कहा था कि मैं जब पैरोल पर आउंगा तो अनिल सोनी का हिसाब भी करूंगा और संयोग से उस कैदी के पैराल पीरियड में ही अनिल सोनी की हत्या हुई है। एसे में पुलिस की जांच के बिंदु भी बार-बार यहां-वहां घुमते दिखाई दे रहे हैं।
दहशतगर्दी को जड़ से खत्म करने का प्लान
पुलिसिया सूत्रों पर भरोसा करें तो आईपीएस विवेक अग्रवाल ने अनिल सोनी हत्याकांड से लेकर अब तक सीमा पार से जारी दहशतगर्दी को काफी करीब से जान लिया और हर पहलू पर मंथन करने के बाद अपने मातहतों के साथ इस दहशतगर्दी को जड़ से खत्म करने के लिए एक एक्शन प्लान तैयार किया है। बताया जा रहा है इसी को लेकर कप्तान ने शुक्रवार शाम मातहतों की ताबड़तोब बैठक भी बुलवाई और बैठक में सभी को पूरा प्लान समझाने के साथ ही अपनी-अपनी जिम्मेदारियां सौंप दी है। साथ ही ताकिद किया है, कि सीमा पार से सालों से जारी दहशत को अब पूरी तरह खत्म करना है। बताया जा रहा है, कि मंदसौर पुलिस ने सीमा पार के तमाम गुंडे-बदमाशों की तथा उनका सहयोग करने वालों की सूची तैयार कर ली है। संभवत: इस पूरे मेटर में प्रतापगढ़ पुलिस का भी पूरा सहयोग लिया जा रहा है।
अजय ने कहा अखबार में लिखूंगा पुलिस का राज खत्म
इधर, शुक्रवार सुबह अनिल सोनी के उठावने के बाद स्वर्णकार समाज सहित व्यापारियों व अन्य समाजजनों ने एकमत होकर कोतवाली पहुंचकर एक ज्ञापन एएसपी मनकामना प्रसाद को दिया। ज्ञापन में अनिल सोनी के हत्यारों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने की मांग की गई। साथ ही अनिल सोनी के पिता और मित्र अजय सोनी ने अपनी जान का खतरा होने पर गनमैन की सुरक्षा मांगी। इस दौरान अजय ने कहा में दैनिक मालवा मेवाड़ अखबार का संपादक हूं जब तक हत्यारों की गिरफ्तारी न हो जाए तब तक रोज कोरा अखबार छापूंगा और 5000 कॉपिया पूरे शहर में बटवाऊंगा चाहे मेरा घर दुकान सब कुछ ना बिक जाए। उस अखबार बड़े-बड़े अक्षरों में ऊपर लिखूंगा कोई शासन नहीं…, कोई तंत्र नहीं गुंडाराज…, पुलिस का राज खत्म…, अपराधियों में भय खत्म…। अजय ने एएसपी से कहा ये मेरा आश्वासन नहीं मेरा वचन है। ज्ञापन में यह भी कहा कि हत्याकांड से जुड़े सभी आरोपियों को शिघ्र गिरफ्तार किया जाए। अन्यथा स्वर्णकार समाज उग्र आंदोलन करने को मजबूर होगा। जिसकी समस्त जवाबदारी प्रशासन को रहेगी।

चुन्नू की तलाश जारी
कोतवाली पुलिस ने अब तक मामले में भोला तिवारी, सहित करीब आधा दर्जन सस्पेक्टेड को हिरासत में लिया हुआ है और उनसे लगातार पूछताछ भी जारी है, तो वहीं मामले के नामजद आरोपी चुन्नू लाला की तलाश में पुलिस अखेपुर सहित चुन्नू के तमाम ठिकानों पर छापामार कार्रवाई करने पहुंची। हालांकि खबर लिखे जाने तक चुन्नू पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ पाया था।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
फिलहाल इस मामले में मैं अधिक तो कुछ नहीं कह पाउंगा, लेकिन हमारे पुलिस दल लगातार काम कर रहे हैं, जिसके अच्छे व सकारात्मक निष्कर्ष निकलकर आएंगे। -विवेक अग्रवाल, एसपी

अनिल सोनी के बाद कौन…?
सोनी हत्याकांड के मामले में पूर्व मंत्री नरेंद्र नाहटा का एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जो काफी पसंद भी किया गया। दरअसल नाहटा ने सीधे तौर पर सवाल उठाते हुए कहा कि अनिल सोनी की गोली मार कर हत्या हो गई। इसके पहले वीरेन्द्र ठन्ना, अनिल त्रिवेदी, राहुल डोसी, प्रहलाद बंधवार, कमलेश जैन और भी कितने ही लोग। अब हर मौत को सहजता से लेने की हमारी आदत हो गई है। हर आदमी के मरने की खबर को हम ऐसे लेते है मानो टीवी पर वारदात कार्यक्रम देख रहे हो। थोड़ी देर के लिए दोस्तों में घटना की चर्चा कर लेंगे और अपने काम में लग जाएंगे। जिस शहर की कानून व्यवस्था इतनी खराब हो वहां कौन सुरक्षित है। मैं जानता हूँ कि जब मै यह कहूंगा कि कल हममे से किसी का नंबर आ सकता है, तो मुझसे असहमत होंगे। उनकी हत्या के तो कारण गिना देंगे। पर क्या हमारे बच्चे नहीं डरते इन खबरों से, हम भयभीत नहीं होते? संपत्ति तो हम सब के पास है, वह सुरक्षित है क्या? हम वह भी देखते रहे, मानते रहे, पर चुप रहे। जवाबदार लोग एलियन कह कर चुप हो गए। हमने पूछा भी नहीं कि एलियन से कौन बचाएगा। हमने पूछा भी नहीं की इन एलियन को किसका संरक्षण है। फिर हम ने इसे साम्प्रदायिक बना लिया। मारने वाले का धर्म देख लिया। उस धर्म से नफरत कर लो, बात खत्म। जब मैंने कहा इंदौर में संदीप अग्रवाल की हत्या में सब मंदसौर वाले थे। अलग धर्म वाले, तो भी हमें फर्क नहीं पड़ता, तो चुप रह जाते हैं। ज्यादा बात कहें तो इसे राजनैतिक बना लेंगे। जो सत्ता में हैं, विपक्ष उसकी बुराई कर के कहेगा, कानून व्यवस्था चरमरा गई है। बंधवारजी की ह्त्या की जांच से उनका परिवार संतुष्ट नहीं है। कभी पूछा कि किस पर शंका है। एक महीने वाली सरकार पर आरोप लगे। कानून व्यवस्था चरमरा गई है पर पिछले वर्षों में हुई घटनाओं का जवाब उनके पास भी नहीं था। इस सच को स्वीकारे। मंदसौर में अब वह बात नहीं रही जिसके लिए इसकी प्रशंसा होती थी। शांति का केंद्र, अब कोई सुरक्षित नहीं, ना हम ना संपत्ति ना हमारे बच्चे। यह क्यों हो रहा है? केवल इसलिए कि हमने सोचना छोड़ दिया है। कही हमारे दोस्त राजनेताओं पर इल्जाम नहीं आ जाए। बस इसलिए चुप है। शहर के एक प्रतिष्ठित व्यक्ति ने मुझसे कहा, जब जनता सुनती नहीं तो क्यों अपने को खतरे में डालते हो। वे मेरे शुभ चिंतक है। पर किसी को तो बोलना पड़ेगा। इस शहर में अब अवैध धन लग रहा है। वह डोडाचूरी से आता है, अफीम से आता है, अवैध संपत्ति से आता है, भ्रष्टाचार से आता है। बगैर मेहनत के कमाया पैसा। यही धन अपराध को जन्म देता है। सस्ती संपत्ति खरीदने के चक्कर में यह लोग बाहर से एलियन को बुलाते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश की स्थिति का आकलन कीजिएगा। यही कारण मिलेंगे। क्यों इस शहर की हालत हुई। क्यों प्रतापगढ़ का जेल मंदसौर के अपराधियों की आरामगाह हो गया? क्यों 300 गाय काटने वाले बच कर निकल गए। पूछना तो छोडिय़े हमने सोचना भी छोड़ दिया है। अभी भी मौका है अपने शहर को बचाने का। सिर्फ सोचना शुरू कीजिए। दोस्तों में बात तो कीजिए अपने बच्चों के लिए ऐसा मंदसौर मत छोड़ कर जाइए। क्या पता कल अनिल सोनी के बाद किसका नंबर आएगा।

patallok

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account