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पहली शादी में टूटा सांसद का टैंकर

जनसंपर्क के दौरान गुप्ता को झेलना पड़ा विरोध
बनी में नहीं बनना, पद्मावति में पिक्चर पिटना सियासी दावं-पैंच में अपनों में ही घीरते जा रहे भाजपा प्रत्याशी
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

किसी की पहली शादी टूटती है, किसी की दूसरी टूटती है। किंतु एसा पहली बार हुआ कि सांसद निधि से मिला टैंकर पहली बार किसी शादी में लगाया गया और वो टैंकर ही टूट गया हो। दरअसल ये किस्सा है ग्राम बनी का, जहां ग्रामीणों ने इस बात को लेकर भाजपा प्रत्याशी व सांसद सुधीर गुप्ता का तगड़ा विरोध किया। खैर बड़ा सवाल यह है, कि पहले पद्मावति रिज़ोर्ट में सांसद की पिक्चर तबियत से पिटाना और अब बनी में उनकी किसी से नहीं बनना। एक के बाद एक इस तरह के विरोधों के चलते सियासी शतरंज में सांसद अपनों के बीच ही घीरते नजर आ रहे हैं। हालांकि इस पूरे षडय़ंत्र के पिछे विरोधियों के दाव-पैंच की भी चर्चा है, लेकिन खुद सांसद गुप्ता जिस शैली और जिस स्वभाव से आते हैं। क्या वे इस तरह के दाव-पैंच का करारा जवाब दे पाएंगे?
दरअसल हुआ यह कि भाजपा प्रत्याशी सांसद सुधीर गुप्ता अपने चेले-चपाटों के साथ रोज की तरह मंगलवार को भी जनसंपर्क पर थे। अभी वे जनसंपर्क करते हुए ग्राम बनी पहुंचे। यहां प्रारंभ में तो कुछ स्थानों पर गुप्ता का स्वागत-सत्कार हुआ, लेकिन एक स्थान पर स्वागत-सत्कार के साथ ही उनके द्वारा सांसद निधि से दिए गए टैंकर के पहली ही शादी में टूटने ओरम्बे से सांसद को दो-चार होना पड़ा। हालात यह तक आए कि ग्रामीणों ने खुब खरी-खोटी सुनाई। हालांकि बाद में सांसद गुप्ता हां…हमम्म्म्… हां करते हुए यहां से जाने लगे। तभी पिछे से कुछ ये आवाजे भी आई कि ये टैंकर लेते जाओ तुम्हारे साथ ही… तो किसी ने कहां हां टैंकर अणा रे लारे फांदी दो…।
प्रदर्शन या तिकड़म
सांसद के लगातार हो रहे विरोध के चलते सियासी पर्दे की औंट से एक कहानी और झांकती दिखाई दे रही है। दरअसल इस कहानी पर गौंर करें तो राजनीतिक हल्कों में एक सवाल जमकर गूंज रहा है, कि सांसद के खिलाफ ये एकाएक उठने वाला वाजिब प्रदर्शन है या पहले से सोची समझी कोई तीकड़म है? क्योंकि ये बात तो संसदीय क्षेत्र का बच्चा-बच्चा भी जानता है, कि सांसद गुप्ता सियासत के किन-किन सुरमाओं की छाती पर पांव देकर लाए हैं। अब सांसद ने तो टिकिट मिलने के बाद अपना पैर उन सुरमाओं की छाती से हटा लिया, लेकिन प्रतिद्वंद का जो सांप सबसे सीने पर लौट रहा है उसका क्या किया जाए? इधर, उनकी प्रतिद्वंदी कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन भी एसे विरोधों, टोने-टोटकों, हल्के हथकंडों और एसी तिकड़मों से शुरू से ही दूर रही है, तो क्या सुधीरजी के साथ अपने ही शह और मात का खेल खेल रहे हैं? संभवत: ये तमाम विरोध इसी कहानी के कुछ किरदारों की मिली-जूली पिक्चर भी हो सकती है।
टिकिट परिवर्तन की भी अफवाह
इधर, लगातार विरोध के चलते मंदसौर के सियासी गलियारों से देश व प्रदेश के राजनीतिक चौबारों तक एक अफवाह आग की तरह फैल रही है। इस पर गौर करें तो वो यह है, कि आगामी 3-4 दिन में मंदसौर संसदीय सीट पर भाजपा की टिकिट परिवर्तन हो सकती है। हालांकि यह इतना आसान नहीं है, लेकिन यदि एसा होता भी है तो कहानी तो घुम-फिरकर वहीं आकर टीक जाएगी कि अभी जिस तरह वर्तमान प्रत्याशी का विरोध उठ रहा है। ठीक उसी तर्ज पर जिसको टिकिट मिलना है उसका भी तो विरोध हो सकता है।

patallok

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