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टन…टन…टन… घंटी बजी नया शैक्षणिक सत्र शुरू

ना तो पुस्तकें मिली, ना ड्रेस मिली
मंदसौर। पूरे जिले में 1 अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू हो गया है जो 1 माह 30 अप्रैल तक चलेगा। 1 मई से 15 जून तक विद्यार्थियों के लिए अवकाश रहेगा 45 दिन के अवकाश के बाद फिर सत्र शुरू हो जाएगा, पूर्व में 1 जुलाई से ही शिक्षा सत्र शुरू होता था जो 30 अप्रैल को खत्म होता था, किंतु नित नए प्रयोगों के चलते शिक्षा विभाग ने सीबीएसई की तर्ज पर एक अप्रैल से नया शैक्षणिक सत्र शुरू कर दिया गया है इसके लिए पूर्व में ना तो कोई तैयारियां थी ना कोई व्यवस्था है, क्योंकि नया शैक्षणिक सत्र शुरू होते ही छात्रों को नई पुस्तकेंऔर नई यूनिफॉर्म मिल जाना चाहिए थी पर ऐसा कुछ नही हुआ।
1 अप्रैल को जिले में जब शैक्षणिक सत्र शुरू हुआ तो कई अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा तो कही खुशियों का अंबार भी लगा। पुरानी फ़टी पुस्तके कक्षा 1 से 12 तक के अधिकांश विद्यार्थियों की पुस्तकें लेकर अगली कक्षा में आने वाले बच्चों को दी जाना थी किंतु प्राय देखने में आया कि छोटे बच्चों ने पुस्तकें परीक्षा होते ही या तो रद्दी में दी या अपने भाई बहनों को दे दी, कहीं कहीं कुछ पुस्तकें फ़टी टूटी अवस्था में जमा हुई, जिसे अगली कक्षा के बच्चों को दिया गया कि वे एक माह तक उनसे अध्ययन करें और जून माह में नई पुस्तकें उन बच्चों को नई कक्षा की दी जाएगी।
पुरानी यूनिफॉर्म
साल भर पुरानी यूनिफॉर्म पहन कर के विद्यार्थी विद्यालय में आए और प्रवेशोत्सव मनाया आए जबकि प्रवेशोत्सव में उत्सव का माहौल होना चाहिए था केवल नाम मात्र का प्रवेश उत्सव मनाना कागजी खानापूरी करना है।
पुरानी व्यवस्था कारगर थी
पूर्व में 1 जुलाई से जो शैक्षणिक सत्र शुरू हो रहा था जब अपने आप में उत्साह और उमंग से छात्र 1 जुलाई को स्कूल में आते थे और बिना प्रवेश उत्सव के ही उत्सव का माहौल विद्यालय का दिखाई देता था पर 1 अप्रैल को राज्य शिक्षा केंद्र से डीपीआईसी चारों तरफ से आदेशों की झड़ी लग गई और 1 अप्रैल को जैसे तैसे प्रत्येक विद्यालय में शिक्षा सत्र शुरू हो गया।
यह रही स्थिति
नगर के ह्रदय में बसने वाला विद्यालय शासकीय कन्या उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालागंज जिसमें शासन के आदेश अनुसार दो माध्यमिक विद्यालय- कन्या माध्यमिक विद्यालय बालागंज और बालक माध्यमिक विद्यालय क्रमांक 1 बालागंज सहित चार प्राथमिक विद्यालय संयोजित कर एक विद्यालय बना दिया गया इसके परिसर में भी आज प्रवेशोत्सव मनाया गया जहां माध्यमिक स्तर के 6 से 8 तक लगभग 50 छात्र छात्राएं उपस्थित रहे वहीं लगभग 4 प्राथमिक में उपस्थिति नगण्य ही रही पर फिर भी उत्सव मनाया गया और बच्चों को जाई फूल लर्निंग के अंतर्गत खेलकूद उनका नए प्रवेश लेने वाले बच्चों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया, उन्हें खेलने के लिए के लिए विभिन्न प्रकार के खेल के उपकरण दिए गए जिससे वे स्कूल के प्रति आकर्षित हो। वही गांव की स्थिति काफी दयनीय रही गांव के विद्यालयों में कहीं-कहीं तो 2-4 विद्यार्थी भी नहीं उपस्थित हुए शिक्षकों को छात्रों को बुलाकर लाना पड़ा और प्रवेश उत्सव की औपचारिकताएं पूरी करना पड़ी।
इन साइड स्टोरी
ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी मई जून के महीने में बच्चे उनके नाना, मामा के यहां चले जाते हैं और वह जुलाई में ही वापस लौटते हैं, परीक्षा होने के बाद केवल 30 अप्रैल को ही विद्यालय में रिजल्ट लेने आते थे, किंतु अब की बार 30 मार्च को रिजल्ट देकर 1 अप्रैल से सत्र शुरू कर दिया किंतु बच्चे अब जुलाई में ही आएंगे उनके लिए तो समझ लीजिए 3 माह का अवकाश हो गया, जबकि शासन ने 45 दिन का घोषित किया है, 90 दिन का अघोषित अवकाश मनाएंगे।
शिक्षकों को नहीं मिलेगा अवकाश का लाभ
पहले शिक्षकों को 2 माह ग्रीष्मावकाश एक माह दीपावली दशहरा और 1 सप्ताह शीतकालीन अवकाश मिलता था किंतु इस वर्ष चुनाव है, जिले में सबसे आखिर में 19 मई को चुनाव होंगे, तब तक शिक्षकों को ड्यूटी पर रहना पड़ेगा और उधर 9 जून से ही उन्हें वापस ड्यूटी पर आना है, ऐसी स्थिति में वे 20 दिन का अवकाश का लाभ भी नहीं ले सकेंगे।

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