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सहायक शिक्षक बन बैठा डीपीसी

अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग
मंदसौर। जिला शिक्षा केंद्र अव्यवस्थाओं और मनमाने ढंग से चल रहा है, जिला शिक्षा केंद्र के अंतर्गत कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों के प्रशासनिक, अकादमी और वित्तीय प्रकरण जिला शिक्षा केंद्र से ही संबंधित हैं किंतु जिला शिक्षा केंद्र पर जिला परियोजना अधिकारी नहीं होने से सब अपनी अपनी ढपली अपना अपना राग सुना रहे हैं, सहायक शिक्षक जो जन शिक्षक नहीं बन सकता वह नकली जिला परियोजना समन्वयक बना हुआ है।
जिला शिक्षा केंद्र के प्रभारी बताते हैं कि वह केवल कार्यालय सहायक है, पर इनके कारनामे पहले भी जिले से लगाकर प्रदेश स्तर तक चर्चित रहे हैं, फिर भी यह डीपीसी के लाडले बने हुए हैं, यहां तक कि डीपीसी के स्थान पर आदेशों पर यह हस्ताक्षर कर आदेश जारी कर देते हैं, डीपीसी के पास 6-7 महत्वपूर्ण विभाग हैं जिले के, इसलिए शिक्षा विभाग में वे कभी-कभी ही दर्शन देते हैं, इस कारण से ढर्रा बिगड़ा हुआ है।
मध्यप्रदेश शिक्षक कांग्रेस की जिला अध्यक्ष सुरेश शर्मा सहित सभी पदाधिकारियों ने बताया कि विद्यालय में समय से पुस्तके नहीं पहुंच रही है, कई विद्यालय साइकिले अभी तक पहुंची नहीं है, जबकि जुलाई माह में मिलना थी जुलाई माह में विद्यालयों को मिलने वाली कांटीजेंसी फरवरी-मार्च में भेजी जाती है, जो खर्च नहीं हो पाती है तो 31 मार्च को शेष बची राशि जिला शिक्षा केंद्र में मंगवा ली जाती है उसका कहां उपयोग होता है यह भी किसी को भी पता नहीं है।
डीपीसी के लाड़ले बीआरसी
जिले में जनपद शिक्षा केंद्र भानपुरा और प्रवीण व्यास और जनपद शिक्षा केंद्र मल्हारगढ़ के बीआरसी शोएब खान इसी कड़ी में डीगांव खुर्द के सहायक शिक्षक शैलेंद्र आचार्य भी हमेशा डीपीसी कार्यालय में बने रहते हैं और बिना पद के अधिकारी के रूप में वे अपने डीपीसी के समस्त अधिकारों का उपयोग करते हैं।
बीआरसी के प्रतिनियुक्ति आदेश के बिंदु क्रमांक 1 के अनुसार 24 मार्च 2016 को ही इनकी प्रतिनियुक्ति समाप्त हो चुकी है किंतु अभी तक वह अपने पद पर बने हुए हैं, क्योंकि ये डीपीसी के लाड़ले अधिकारी हैं यह पद पर कैसे बने हुए हैं यह तो डीपीसी ही बता सकते हैं कि उनकी प्रतिनियुक्ति अभी तक समाप्त क्यों नहीं? हुई हद तो तब हो गई जब समस्त नियमों को ताक पर रखकर डीपीसी ने भानपुरा के बीआरसी को गरोठ का अतिरिक्त प्रभार दे दिया जब ज्यादा विरोध हुआ तो मजबूरी में उन्हें हटाना पड़ा, पर भानपुरा का प्रभार तो अभी भी प्रवीण व्यास के पास ही है जोओपन का भी दागी है।
डीपीसी को हटाने के लिए दिया ज्ञापन
मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने प्रभारी मंत्री हुकुम सिंह कराड़ा एवं जिला कलेक्टर को डीपीसी को हटाने के लिए ज्ञापन दिया था पूरे प्रदेश में संचालक राज्य शिक्षा के आदेशानुसार जहाँ डीपीसी राज शिक्षा केंद्र द्वारा नियुक्त हैं वही कार्य करेंगे और अगर डीपीसी नहीं है वहां का प्रभार जिला शिक्षा अधिकारी के पास होगा पर पूरे प्रदेश में मंदसौर जिला ऐसा है जहां पर संचालक के आदेशों का पालन नहीं होता है और एक बाल श्रम अधिकारी को डीपीसी बना रखा है इनके पास 6-7 महत्वपूर्ण विभाग हैं जिसके कारण से यह जिला शिक्षा केंद्र में कभी-कभी दर्शन देते हैं।
पद का दुरूपयोग
शैलेंद्र आचार्य सहायक शिक्षक डिगांव खुर्द को इस कार्यालय में केवल कार्यालय सहायक के रूप में आदेशित किया गया है, वह भी शाम को 5 बजे बाद किंतु वे अपने आप को एपीसी मानकर विद्यालय की बजाय जिला शिक्षा केंद्र में ही अपना समय व्यतीत करते हैं, यहां तक की वे जिला परियोजना समन्वयक के स्थान पर आदेशों पर भी हस्ताक्षर करते हैं, जिसका उन्हें अधिकार नहीं है, नियमानुसार वे जन शिक्षक के भी पात्र नहीं हैं पर अपने आपको एपीसी बताते हैं और कहीं कहीं तो वे अपने आप को डीपीसी की जगह हस्ताक्षर करते हैं इसका प्रमाण भी पालों ने के पास है।
पूर्व में भी शैलेंद्र आचार्य मास्टर ट्रेनर थे तब शिक्षकों के साथ जो अभद्रता की थी उसे लेकर जिले के सभी कर्मचारी संगठनों ने तत्कालीन तत्कालीन प्रभारी डायट प्राचार्य से मिले और इन्हें यहां से कार्यमुक्त करवाया था।

यह है अव्यवस्थाओं का नमूना
जिला शिक्षा केंद्र द्वारा दिनांक 18 मार्च को आदेश क्रमांक जिसिके 375 जारी किया गया जिसके अंतर्गत 19 एवं 20 को मार्च को कक्षा 1 से 8 तक के सभी विद्यालयों के शिक्षकों का जॉय फुल लर्निंग को लेकर प्रशिक्षण था उक्त आदेश में जिला परियोजना समन्वयक के स्थान पर डिगांव खुर्द के सहायक शिक्षक शैलेंद्र आचार्य ने हस्ताक्षर किए। जबकि डीपीसी से हुई चर्चा के अनुसार शैलेंद्र आचार्य को यह अधिकार नहीं दिया गया है।
इनका कहना
मध्य प्रदेश शिक्षक कांग्रेस ने प्रांतीय संरक्षक एवं बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष रामेश्वर नीखरा से चर्चा की है इस हेतू शिक्षक कांग्रेस बीआरसी प्रवीण व्यास एवं बीआरसी शोएब खान की प्रतिनियुक्ति निरस्त करवाने हेतु न्यायालय की शरण लेगी एवं 24 मई 2016 के बाद इनके द्वारा जितने भी निर्णय वित्तीय, प्रशासनिक, अकादमी, अशासकीय विद्यालयों के निरीक्षण उनकी समीक्षा हेतु वाद दायर करेगी एवं जिस अधिकारी द्वारा इन्हें पद पर बनाए रखा उनसे उनके वेतन की वसूली की कार्रवाई हेतु न्यायालय की शरण शिक्षक कांग्रेस लेगी।
सुरेश शर्मा, जिला अध्यक्ष
मप्र कांग्रेस, जिला मंदसौर

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