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निर्भया ने निभाई अपनी जिम्मेदारी

दो मासूम बच्चियों को मिलवाया अपने अभिभावकों से, घर से खेलते-खेलते भटककर पहुंच गई थी बीपीएल चौराहा
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

शहर में महिलाओं व युवतियों की सुरक्षा के लिए गठित महिला पुलिस के निर्भया दल ने अपनी ड्यूटी के दौरान शनिवार को एक अच्छी मिसाल पेश करते हुए घर से भटकी महज ढाई व साढ़े तीन साल की दो मासूम बच्चियों को पुन: अपने अभिभावकों से मिलवाया। इस कहानी के दौरान निर्भया ने करीब दो घंटे शहर के कई मोहल्ले बच्चियों के घर की तलाश में छान मारे। क्योंकि एक बच्ची सिर्फ अपना नाम ही बता पा रही थी।
मंदसौर वही शहर है, जहां स्कूल से अगवा कर एक सात वर्षीय परी के साथ दो नर पिशाचों ने दुष्कृत्य कर जंगल में मरने के लिए छोड़ दिया था, लेकिन शनिवार को इसी मंदसौर की धरती पर एक और नेकी कुछ नागरिकों व पुलिस के निर्भया दल ने की जो शायद परी वाले उस कलंक को साफ करने में कुछ कारगर साबित हो। दरअसल कुछ नागरिकों ने बीपीएल चौराहे पर दो मासूम बच्चियों को अकेली भटकते देखा और कोतवाली फोन लगाया। इस पर निर्भया मोबाइल प्रभारी उप निरीक्षक वंदना शाक्यवार अपनी टीम प्रशिक्षु एसआई लक्ष्मी सिसौदिया व चार महिला आरक्षकों के साथ यहां पहुंची। मौके पर उनने दो बालिकाओं को घुमते पाया और उन्हें कंट्रोल रूम लेकर आई। इसके बाद इन मासूम बच्चियों में से एक ने अपनी तुतलाती हुई आवाज में कहा कि उसका नाम नव्या पिता सुरेश है। बस इससे अधिक बालिका कुछ नहीं कह पा रही थी। एसे में निर्भया ने अपनी गाड़ी दौड़ाई और बीपीएल के आसपास के तमाम गली-मोहल्ले बच्चियों को लेकर छान मारे। लगभग दो घंटे की मशक्कत के बाद बालागंज में कुछ लोगों ने कहा कि ये बालिकाएं हमें आज यहीं से गुजरती हुई दिखी थी। यहीं आसपास थोड़ी मेहनत और की गई तो पति-पत्नी को देख नव्या अचानक उनके पास दौड़ पड़ी और महिला को अपनी मां कहने लगी। उक्त दंपत्ति के चेहरे पर भी अपनी बेटी के गूम होने की शिकस्त अलग ही दिख रही थी। पूछताछ में पता चला कि उनका नाम बसंतीलाल सूर्यवंशी निवासी पटेल नगर लालघाटी रोड हाल मुकाम बालागंज है, जो अपनी पत्नी के साथ मजदूरी पर जाते हैं और शनिवार को भी अपनी ढाई साल की बेटी नव्या को छोड़कर मजदूरी पर गए थे और वह खेलती-खेलती घर से निकल गई और भटककर बीपीएल तक पहुंच गई।
सुष्मा को नव्या के यहां छोड़ गए थे अभिभावक: बालागंज पहुंचकर निर्भया को एक बालिका के माता-पिता तो मिल गए, लेकिन दूसरी का अभी भी ठिकाना नहीं था। तब नव्या के ही माता पिता ने बताया कि सुष्मा जीवागंज की रहने वाली है और उसके पिता का नाम सुरेश है। वे दोनों उसे हमारे यहां खेलने के लिए छोड़ गए थे और यहीं से दोनों बच्चियां खेलते-खेलते घर से निकली और भटक गई। बाद में निर्भया ने दोनों अभिभावकों को कोतवाली बुलवाकर सारी कागजी कार्रवाई पूर्ण कर उन्हें बच्चियों को सुपूर्दगी में दिया।

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