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लोकसभा उम्मीद्वारी को लेकर नई नाल ठुकवाते अरबी घोड़े!

मंदसौर। लोकसभा चुनाव के टिकट को लेकर कांग्रेस से ज्यादा भाजपा में कुस्तम पछाड़ है, उधर से मीनाक्षी नटराजन का नाम लगभग तय माना जा रहा है तो इधर से सांसद सुधीर गुप्ता के अलावा कैलाश विजयवर्गीय, चैतन्य काश्यप, बंशीलाल गुर्जर, कैलाश चावला, पूर्व सांसद लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के जानशी सुरेन्द्र पाण्डेय और युवा नेता अनिल कियावत सहित रघुनंदन शर्मा नाम सांसद श्री गुप्ता को ओव्हर टेक करने के लिये चल रहे है।
अव्वल तो पांच साल राजी खुशी से निपटाने वाले सांसद गुप्ता का नाम बायपास होने की कोई बड़ी स्थिति सामने नहीं आ रही है बावजूद इसके उनके मायनस फेक्टर भी कम है… नय नवेले सांसद होने के बावजूद उन्होंने खुद के नाम को स्थापित करने की खूब मशक्कत की, यही नहीं विकास और संसदीय क्षेत्र के विस्तार को लेकर वे गम्भीर रहे है बावजूद इसके चैतन्य काश्यप उनके साथ है, संघ लॉबी के वे चहेते है लेकिन परिवर्तन के नाम और भारी आमद को लेकर सुधीर जी दावेदारी को कट लगाया जा सकता है। रतलाम विधायक व भाजपा की सियासत में अपने चेहरे-मोहरे चलाने में कारसाज भैयाजी की संसदीय क्षेत्र में की गई पुरानी मेहनत के करवट लेने का समय भी है सो लगता है कि सुधीर जी और भैय्या जी में लोकसभा का यह मैच फिक्सिंग हो जाए क्योंकि सुधीर जी भैय्या जी की गेंग के रायलगार्ड माने जाते है सो उन्हें आगे-पीछे कहीं सेट करने की बात के चलते भैय्या जी अपनी छोड़ी हुई चौसर (संसदीय क्षेत्र) में फिर से चौकडिय़ा भर सकते है।
पूर्व मंत्री और विधायक कैलाश चावला का नाम भी लोकसभा के लिए अंडर ग्राउण्ड रूप से चल रहा है… दिल्ली के दरबार के पीरो-मुरशीदों से भी इस नाम को लेकर बात चल रही है इस नाम के साथ अनुभव भी चस्पा है वह इसलिए कि मंदसौर, सीतामऊ और मनासा के विधायक होने का अनुभव आधे से ज्यादा लोकसभा क्षेत्र नाप तो सकता है फिर भी पूर्व संसदीय क्षेत्र में उनकी पकड़ और परिपक्वता का कोई सानी नहीं लेकिन ऐज फेक्टर यहां चावला जी की दावेदारी को दगा देता नजर आ सकता है।
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय का नाम आते ही यहां उम्मीदवारी के लिये चलते नाम सिकुड़ते नजर आते है… क्योंकि इन्दौरी उम्मीदवार होने के बावजूद विजयवर्गीय को अगर सांसद बनना है तो वे मंदसौर लोस को ही चुनेंगे और ऐसे में उनके नाम की काट करने वाले दूर की कोड़ी लाने वाले साबित होंगे सो विजयवर्गीय के नाम की काट मुश्किल ही नहीं नामुमकित लगती है यह नाम अचानक पैराशूट से उतरकर लोकसभा क्षेत्र में कुलाचें भर सकता है।
स्व लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के अखाड़े से सियासती दांव-पेंच और शह-मात के औजार घुमाने वाले उनके पुत्र सुरेन्द्र पाण्डेय भी इस बार दावेदारी को लेकर पूरे शबाब पर है, वे विधानसभा चुनावों में दबे पांव लोस की रिर्हसल भी कर चुके है… और जावद, सिंगोली, मनासा, सीतामऊ, गरोठ, भानपुरा सहित अन्य क्षेत्रों में दबे-पांव एडवांस में फिल्डिंग कर चुके है… छोटे पाण्डेय दिल्ली के सभी सियासती गलियारों के पेंचों खम से वाकिफ होते हुए वहां के पीर बबर बिस्तियों से ट्यूनिंग रखते है… इसलिए इस लोकस के चुनाव में दावेदारी के अलावा वे वो चना बन चुके है जो वक्त आने पर भले ही भाड न झोंक पाये लेकिन भडभूजे की आंख जरूर फोड़ सकते है… छोटे पाण्डेय के चले पासे अन्य उम्मीदवारों के समीकरण बना और बिगाड़ सकते है… फिलहाल वे अपनी उम्मीदवारी की पनडुब्बी को सरपट चला रहे है।
रघुनंदन शर्मा यूं तो लोकसभा की दावेदारी को एक तरह से खारीज कर चुके है लेकिन उनके मन में फूट रहे लड्डुओं की आवज को सियासी दाव-पेंच समझने वाले आसानी से सुन सकते है, बावजूद इस नाम में अब वो तासीर नहीं बची है जो कभी थी इसलिए रघुनंदन जी को दावेदारी का चंदन लगाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन लगता है।
जिला, प्रदेश और दिल्ली के सियासती गलियारों में अपनी कार्यशैली का लोहा मनवाने वाले नेता बंशीलाल गुर्जर को पार्टी और संगठन बड़ी-बड़ी जवाबदारियों से नवाज चुका है जो उन्होंने बखूबी निभाई भी है… पिछले तीन विधानसभा चुनावों में उन्हें विधायक का टिकट दिया जाना तय माना जा रहा था… इसी तरह पिछले लोकसभा चुनाव में भी उनकी दावेदारी न सिर्फ मजबूत थी बल्कि उनका टिकट तय माना जा रहा था लेकिन हर बार अंतिम ओव्हरों में श्री गुर्जर के साथ गेम हो जाता है… भाजपा का यह खुरदुरा चेहरे कई चॉकलेटी चेहरों पर भारी होकर प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर नेतृत्व करने की क्षमता रखता है ऐसे में श्री गुर्जर को सत्ता और संगठन तवज्जों तो देता है लेकिन टिकट की बारी आते ही उनके हक के साथ ऐनकाउंटर किया जाता रहा है। इस बार श्री गुर्जर के समर्थक दम साधकर टिकट मिलने की इंतजारी में है।
किशोरवय से की गई मेहनत मशक्कत को लेकर खामोशी से पोलटिक्स करने वाले अनिल कियावत दमदारी से विधानसभा चुनावों में अपनी बनाई हुई क्रांक्रीट जमीन पर दावेदारी कर चुके है… इससे कियावत दावेदारी को लेकर विमुख रहे वे मल्हारगढ़, सुवासरा, मंदसौर मंदसौर और नीमच के विधानसभा क्षेत्रों के अधिकतर गांव-खेड़ों में वे मालवा के गांधी स्व लक्ष्मीनारायण पाण्डेय के चुनाव मेनेजमेंट को लेकर तीन बार छान चुके है… इन क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं से वे जीवन सम्पर्क रखते है भाजयुमो के जिलाध्यक्षीय के दौरान वे गांव-गांव के नौजवानों के सतत् सम्पर्क में रहे है… ३ बार नगरपालिका मंदसौर का चुनावी मेनेजमेंट देख चुके है… मल्हारगढ़ विधानसभा का चुनावी मेनेजमेंट ३ बार देख चुके है, कियावत ने इस बार किसान आंदोलन के क्षेत्र में जगदीश ‘दाÓ की टीम के साथ भाजपा को जीतवाकर नये समीकरण पैदा कर दिये… लोकसभा की दावेदारी को लेकर कियावत के नाम को नया देखने का अंदाजा लगाना इसलिए भी गलत साबित हो सकता है कि जब सुधीर जी की उम्मीदवारी तय हुई थी तो उनका नाम भी हल्के में लिया जा रहा था।

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