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मछली फंसी जाल में मगरमच्छ हुए आजाद

लोकायुक्त की कार्रवाई
मंदसौर। शिक्षा विभाग में लोकायुक्त ने छापा मारकर अशासकीय विद्यालय को मान्यता देने की टेबल के प्रभारी बाबू मनीष मौर्य को राजेश जोशी से अशासकीय विद्यालय की मान्यता के नवीनीकरण के मामले में 15000 रूपए की रिश्वत लेते में लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। जिले में लगभग 600 विद्यालय अशासकीय विद्यालय हैं और इन अशासकीय विद्यालय की मान्यता के नियम काफी कड़े और जटिल है। कई बीच में गलियां और कमियां भी है जिसे लेकर के मान्यता के निरीक्षण को से लगाकर मान्यता लेने तक प्रत्येक स्कूल को लगभग 40 से 50 हजार रूपए अपनी मान्यता के लिए देना पड़ता है।
सबसे पहले बीआरसी निरीक्षण करता है और उसके निरीक्षण को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में जांच की जाती है अगर यहां से ओके हो जाता है तो उस विद्यालय को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा मान्यता जारी कर दी जाती हैं।
कक्षा 1 से 8 तक की मान्यता के लिए आवेदन ऑनलाइन किया जाता है और बीआरसी उसका निरीक्षण करता है उस निरीक्षण में बड़े स्कूलों को छोड़ दें तो छोटे स्कूलों के पास ना तो इतने अधिक कमरे होते हैं खेल का मैदान और नहीं भौतिक सुविधाएं होती है।
तब होता है बीआरसी द्वारा मान्यता के लिए मोलभाव का खेल बीआरसी छात्र संख्या और स्थिति देखते हुए 20 से 25 हजार रूपए तक लेते हैं उसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में उनकी फाइल आती है, जहां पर निरीक्षण परीक्षण के नाम पर 20 से 30 हजार रूपये नवीनीकरण के लिए जाते है मनीष मोर्य ने राजेश जोशी 20000 की मांग की थी और 15000 में सौदा तय हो गया था। जिसकी शिकायत सरस्वती कान्वेंट शामगढ़ के संचालक राजेश जोशी ने उज्जैन लोकायुक्त ने की थी और लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार निरोधक कानून के अंतर्गत रंगे हाथ गिरफ्तार किया।
सबसे ज्यादा पैसा जिले के बीआरसी लेते हैं और बीआरसी भानपुरा प्रवीण व्यास एवं बीआरसी मल्हारगढ़ शोएब खान जिन की प्रतिनियुक्ति उनके नियुक्ति आदेश के बिंदु क्रमांक 1 के अंतर्गत 24 मई 2016 को ही समय समाप्त हो गई किंतु प्रवीण व्यास ने तो डीपीसी से मिलकर के और गरोठ का प्रभार भी ले लिया था।
जबकि उसकी प्रतिनियुक्ति स्वमेव समाप्त हो चुकी थी और प्रभार लेने का मुख्य कारण ही अशासकीय विद्यालयों की मान्यता के निरीक्षण में विकासखंड में लगभग 200 स्कूलों का निरीक्षण किया और उसमें जमकर भ्रष्टाचार का खेल हुआ।
शिक्षक कांग्रेस ने दिया था ज्ञापन: प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा को 3 बार ज्ञापन पत्र बीआरसी प्रवीण व्यास भानपुरा, बीआरसी शोएब खान मल्हारगढ़ और डीपीसी मंदसौर दिए को हटाने के लिए दिए थे ताकि भ्रष्टाचार समाप्त हो सके किंतु डीपीसी की मिलीभगत से बीआरसी अभी तक अवैध रूप से अपने पद पर बने हुए हैं।
आदेश तो ये भी हैं: संचालक लोक शिक्षण के आदेश के अनुसार जहां पर शिक्षा विभाग के डीपीसी नहीं है वहां पर जिला शिक्षा अधिकारी को डीपीसी का प्रभार सौंपने का आदेश 1 साल के लगभग हो गए हैं किंतु कलेक्टर ने आज तक डीपीसी का प्रभार नहीं हटा पाए क्योंकि डीपीसी अवैध रूप से बीआरसी बनाकर के और काफी लंबी चौड़ी वसूली कर रहे हैं।
ये कहते हैं बीआरसी: मान्यता के लिए जो राशि लेते हैं ऊपर तक पहुंचानी पड़ती है और आज के सिद्ध हो गया कि बीआरसी मिलकर मान्यता नवीन/नवीनीकरण का खेल खेलते हैं उससे लाखों रूपए की हेरा फेरी होती हैं।
मछली और मगर: मनीष मौर्य तो एक छोटी मछली है बीआरसी तो मगर मच्छ जाल भी लेकर भाग जाएंगे पकड़ में नहीं आएंगे क्योंकि यह भ्रष्टाचार करने में माहिर हो गए हैं कि उन्हें पकडऩा आसान नहीं है मनीष मौर्य अभी 2 वर्ष ही हुए थे इस टेबल पर आए इस कारण से पकड़ में आ गया।
गुरूवार को भी हुआ था विवाद: गरोठ, शामगढ़ अशासकीय विद्यालयों के लगभग 70 से ८० संचालक गुरुवार को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में डेपुटेशन लेकर के आए थे और मान्यता को लेकर जिस प्रकार उन्हें परेशान किया जा रहा है उस पर उन्होंने जिला शिक्षा अधिकारी से चर्चा की थी और आज तो लोकायुक्त ने मान्यता के प्रभारी मनीष को धर दिया।

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