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जीत के दर्जनभर आंकड़े पर पहुंच सकेगी भाजपा?

मंदसौर लोस के इतिहास में अब तक 16 में से 5 चुनाव कांग्रेस ने तो सर्वाधिक 11 चुनाव जीत चुकी है भाजपा, इस बार और जीतती है भाजपा तो लोस क्षेत्र में दर्जनभर जीत के पायदान पर होगी
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

ये मंदसौर की वो सियासत हैै, जिसने एक ही पार्टी को एक नहीं बल्कि अब तक हुए 16 लोस चुनावों में से 11 बार मौका दिया, जो है भारतीय जनता पार्टी। जबकि यहां कांग्रेस के अब तक 5 उम्मीद्वार ही जीत का स्वाद चख पाए हैं। खास बात तो यह है, कि पड़ोसी जिले के जावरा से आए डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय को मंदसौर ने कुछ एसा गले लगाया कि वे यहां से 8 बार सांसद रहे। अब देखना यह है, कि आगामी 17वें लोस के चुनाव में मंदसौर की माटी किस पर मेहरबान होती है। यदि भाजपा जीत का परचम लहराती है, तो आसानी से यह कहा जाएगा कि भाजपा ने यहां दर्जनभर जीत का पायदान प्राप्त किया और यदि कांग्रेस जीतती है तो ज्यादा तो नहीं, लेकिन आधा दर्जन के पायदान पर वह भी पहुंच सकती है। खैर इसी तरह के कई-कई कारण है, कि दोनों पार्टियों में उम्मीद्वारी को लेकर गहन मंथन जारी है।
19 मई को यानि लोकसभा चुनाव के सातवें व अंतिम चरण में मंदसौर लोकसभा चुनाव होना है। यानि सीधे तौर पर आचार संहिता के बाद करीब 3 माह लगातार आम जनता को चुनाव के लिए इंतजार करना होगा। हालांकि मुनिमजी और गुप्ताजी के यहां जरा सी भीड़ देखकर समोसे और पावबड़े के इंतजार में उंची-नीची होने वाली इस शहर की जनता के लिए यह इंतजार उबाउ तो होगा, लेकिन साथ ही साथ इस संसदीय क्षेत्र के आवाम के सियासी मिजाज के हिसाब से यह ठीक भी है, कि इस बार चुनावी दंगल का आनंद अधिक समय तक मिलता रहेगा। बात मंदसौर लोकसभा सीट पर भाजपा की करें तो यह सीट भारतीय जनता पार्टी के मजबूत गढ़ में से एक है। प्रदेश बीजेपी के दिग्गज नेता रहे डॉ लक्ष्मीनारायण पांडेय के भरोसे बीजेपी को इस सीट पर सबसे ज्यादा जीत मिली है। खुद पांडेय 8 बार यहां से सांसद रह चुके हैं। कांग्रेस का इस सीट पर प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा है और उसको सिर्फ 5 बार यहां जीत मिली है। कांग्रेस की दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन यहां से सांसद रह चुकी हैं। उन्होंने 2009 के चुनाव में यहां पर जीत हासिल की थी। हालांकि अगले चुनाव में उनको हार मिली और संघ की पृष्टभूमि से आने वाले बीजेपी के सुधीर गुप्ता यहां के सांसद बने।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यहां पर साल 1951 में यहां पहला चुनाव हुआ था, जिसमें प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कांग्रेस के कैलाशनाथ काटजू को जनता ने मौका दिया। दूसरी बार चुनाव हुआ तब भी कांग्रेस के मानकलाल ने जीत हासिल की थी। इसके अगले चुनाव में यह सीट कांग्रेस से छिन गई और जनसंघ को जीत मिली। लगातार 5 चुनाव में हार मिलने के बाद कांग्रेस को इस सीट पर जीत साल 1980 में मिली. कांग्रेस(आई) के भंवरलाल राजमल ने पिछला दो चुनाव जीतने वाले लक्ष्मीनारायण पांडेय को मात दी। इसके अगले चुनाव में भी कांग्रेस को जीत मिली, लेकिन 1989 में बीजेपी के लक्ष्मीनारायण पांडेय ने फिर यहां पर वापसी की और जीत हासिल की। पांडेय ने इसके बाद लगातार 6 चुनावों में जीत हासिल करते हुए यहां पर अपना दबदबा बनाए रखा। 2009 के चुनाव में कांग्रेस ने उनको हराने के लिए दिग्गज नेता मीनाक्षी नटराजन को यहां से उतारा। कांग्रेस का यह कदम सफल साबित हुआ और यहां पर उसका सूखा खत्म हुआ। हालांकि इसके अगले चुनाव यानी 2014 में नटराजन को बीजेपी के सुधीर गुप्ता के हाथों हार का सामना करना पड़ा। ऐसे में देखा जाए तो मंदसौर लोकसभा सीट बीजेपी के दबदबे वाली सीट है। लक्ष्मीनारायण पांडेय का तो यहां पर खूब जादू चला है और उन्होंने सबसे ज्यादा 8 चुनावों में जीत हासिल की। कांग्रेस को इस सीट पर 5 चुनावों में ही जीत मिली है। मंदसौर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत विधानसभा की 8 सीटें आती हैं। जावरा, सुवासरा, नीमच, मंदसौर, गरोठ, जावद, मल्हारगढ़, मनासा यहा कीं विधानसभा सीटें हैं। यहां की 8 विधानसभा सीटों में से 7 पर बीजेपी और 1 पर कांग्रेस का कब्जा है।
संसदीय क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना
मंदसौर मध्य प्रदेश का वो जिला है जो हिंदू और जैन मंदिरों के लिए खासा लोकप्रिय है। आजादी के पहले यह ग्वालियर रियासत का हिस्सा था। पशुपतिनाथ मंदिर, बही पाश्र्वनाथ जैन मंदिर और गांधीसागर बांध यहां के मुख्य दर्शनीय स्थल हैं। इस जिले में अफीम का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। मंदसौर राजस्थान के चित्तौडगढ़़, कोटा, भीलवाड़ा, झालावाड़ और मध्य प्रदेश के रतलाम जिलों से घिरा हुआ है। 2011 की जनगणना के मुताबिक मंदसौर की जनसंख्या 24,72,444 है। यहां की 75.49 फीसदी आबादी ग्रामीण क्षेत्र में रहती है और 24.51 फीसदी आबादी शहरी क्षेत्र में रहती है। मंदसौर में 16.78 फीसदी आबादी अनुसूचित जाति की है और 5.36 फीसदी आबादी अनुसूचित जनजाति की है। चुनाव आयोग के आंकड़े के मुताबिक 2019 के लोकसभा चुनाव में यहां पर 1744952 मतदाता हैं। इनमें से 851149 महिला मतदाता और 893770 पुरुष मतदाता तथा अन्य मतदाता 27 हैं। 2014 के चुनाव में यहां पर 71.40 फीसदी मतदान हुआ था।
पिछले 2 चुनावों के परिणाम
2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के सुधीर गुप्ता ने यहां पर जीत हासिल की। उन्होंने कांग्रेस की मीनाक्षी नटराजन को हराया था। सुधीर गुप्ता को 697620 वोट मिले थे तो वहीं मीनाक्षी नटराजन को 394470 वोट मिले थे। दोनों के बीच हार जीत का अंतर 303150 वोटों का था। वहीं आम आदमी पार्टी .88 फीसदी वोटों से साथ तीसरे स्थान पर रही थी। इससे पहले 2009 के चुनाव में मीनाक्षी नटराजन को जीत मिली थी। उन्होंने बीजेपी के लक्ष्मीनारायण पांडेय को हराया था। इस चुनाव में नटराजन को 342713 वोट मिले थे तो वहीं पांडेय को 373532 वोट मिले थे। नटराजन को इस चुनाव में 30819 वोटों से जीत मिली थी।

सांसद का रिपोर्ट कार्ड
60 साल के सुधीर गुप्ता 2014 में पहली बार सांसद चुने गए। 16वीं लोकसभा में उनके प्रदर्शन की बात जाए तो संसद में उनकी उपस्थिति 90 फीसदी रही। उन्होंने लगभग 354 से अधिक बहस में हिस्सा लिया और तकरीबन 1055 सवाल भी किए। साथ ही उन्होंने 1 प्राइवेट मेंबर बिल भी लाया। आम तौर पर किसी भी सांसद को 25 करोड़ की सांसद निधी प्राप्त होती है। सांसद गुप्ता ने प्रदेश में सर्वाधिक प्रस्ताव 28 करोड़ के विकास कार्यों के भेजे थे, ताकि सांसद निधी लेब्स न हो। उनके मंदसौर कार्यालय के अनुसार उनकी तमाम निधी खर्च की जा चुकी है।

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