NEWS :

होली से पहले खुनी होली खेलने वालों को उम्र कैद

मामला: बहूचर्चित वीरेंद्र ठन्ना हत्याकांड का, चार साल बाद आया कोर्ट का फैसला
मामले में कोर्ट ने 11 में से 4 आरोपियों को सुनाया आजीवन कारावास, आजम, अरमान, शानू पेचकस व रफीक ता-उम्र 24 ताणी के पिछे
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

कुछ ही दिनों में देशभर में होली खेली जाएगी, लेकिन मंदसौर कोर्ट ने इस खुशियों की होली से पहले ही 4 साल पूर्व जमीन विवाद में शहर के प्रतिष्ठित व्यापारी वीरेंद्र ठन्ना की हत्या कर खुन की होली खेलने वाले 4 आरोपियों को आजन्म कारवास की सजा से दंडित कर ठन्ना परिवार के लिए ये होली खास बना दी है। दरअसल अपने मुखिया की सरे राह हत्या के बाद से ही परिवार कोर्ट की ओर उम्मीद भरी निगाह से टकटकी लगाए हुए था और कोर्ट ने रविवार को अपने फैसले से इस परिवार को न्याय दिया। हालांकि मामले में शेष 7 आरोपियों को जिन पर षडय़ंत्र में शामिल होने का आरोप था उन्हें कोर्ट ने दोष मुक्त कर दिया है।
चिन्हित जद्यन्य सनसनीखेज प्रकरण एडीजे 4 जयंत शर्मा ने आरोपीगण सरफराज उर्फ शानू पेचकस पिता मुन्नाखां उर्फ मुनव्वर 24 साल निवासी कच्ची बस्ती प्रतापगढ, अरमान उर्फ समीर उर्फ विक्की पिता सलीम खान 23 साल निवासी 37/11 गोंदशाह उज्जैन हाल मुकाम इंद्रा कॉलोनी झुग्गी बस्ती मदंसौर, रफीक पिता नत्थू खां मुसलमान 33 साल निवासी मिर्चीवाड़ा गोद दरवाजा मदंसौर व आजमलाल पिता कय््यूम लाला 36 साल निवासी अखेपूर जिला प्रतापगढ को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रकरण में मृतक वीरेंद्र के चचेरे भाई सुरेंद्र ठन्ना की रिपोर्ट पर से कोतवाली पुलिस ने धारा 302, 34 भादवि, 25, 27 आम्र्स एक्ट के तहत केस दर्ज कर विवेचना में लिया। विवेचना पूर्ण कर धारा 120-बी, 302, 473 भादवि व धारा 25, 27 ऑम्र्स एक्ट के अंतर्गत विवेचक निरीक्षक एमपीसिंह परिहार ने अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रकरण चिन्हित जद्यन्य सनसनीखेज प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था। विवेचना में तथ्य पाया गया की वीरेंद्र ठन्ना की दलौदा स्थित जमीन का विवाद न्यायालय में विचाराधीन है, जिस बात को लेकर कुछ कुख्यात लोगों ने न्यायालय के बाहर राजीनामा करने की बात को लेकर वीरेंद्र ठन्ना को डराया था। अनुसंधान के अनुसार पुलिस ने सरफराज, अरमान, राजेंद्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह, दिलीपसिंह, रफीक, आजम लाला, बाबू फकीर, रफीक व जमील को प्रकरण में आरोपी बनाया। संपूर्ण अनुसंधान उपरांत न्यायालय में आरोपीगण के विरूद्ध चालानी कार्यवाही की गई। प्रकरण में अभियोजन का संचालन उप संचालक अभियोजन बापुसिंह ठाकुर के द्वारा किया गया। उल्लेखनीय है कि उक्त प्रकरण चिन्हित जद्यन्य सनसनीखेज प्रकरण की श्रेणी में रखा गया था।

घटना का संक्षिप्त विवरण
30 दिसंबर 2015 को रात्रि 8 बजे के लगभग कालाखेत के इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी वीरेंद्र ठन्ना निवासी शुक्ला कॉलोनी घटना दिनांक को अपने चचेरे भाई सुरेंद्र ठन्ना के साथ अपनी दुकान बंद करके अपनी मोटर सायकिल से घर शुक्ला कॉलोनी जा रहे थे। वीरेंद्र ठन्ना के पीछे उनका चचेरा भाई सुरेंद्र अपनी मोटर सायकिल से आ रहा था। जब वीरेंद्र ठन्ना सुचित्रा टॉकिज तक पहुंचे ही थे कि तभी अचानक सामने से मोटर सायकिल पर तीन लड़के आकर रूके और नीचे उतर कर दो लड़कों ने पिस्टल निकाल कर वीरेद्र ठन्ना पर फायर कर दिए। गोली लगने से वीरेद्र ठन्ना निचे गिर गए। हमलावर फायर कर अपनी मोटर सायकिल से भाग गए। पीछे से आ रहे चचेरे भाई सुरेंद्र मौके पर एकत्रित लोगों की मदद से वीरेंद्र ठन्ना को जिला अस्पताल ले गए, जहां चिकित्सकीय परीक्षण में वीरेंद्र को मृत घोषित कर दिया।
31 साक्षियों के हुए बयान
न्यायालय में प्रकरण के विचारण के दौरान अभियोजन ने कुल 31 साक्षियों के कथन कराते हुए प्रकरण में संलग्न दस्तावेजों को ऑर्टिकल 1 लगायत 27 तक प्रदर्शित करवाया तथा जब्तशुदा ऑर्टिकल को ए लगायत जे तक प्रदर्शित करवाया। बचाव पक्ष के ने अपने बचाव में 3 साक्षी प्रस्तुत किए, जिनका अभियोजन ने खंडन किया। इस प्रकार प्रकरण में संलग्न दस्तावेजों ओर साक्षियों के कथनों व जब्तशुदा ऑर्टिकल से अभियोजन की कहानी का पूर्णत: समर्थन हुआ। इससे संतुष्ट होकर मंगलवार को न्यायालय ने 4 आरोपियों को आजीवन कारावास से दंडित किया।
किस धारा में कितनी किसको सजा
न्यायालय के फैसले के अनुसार सरफराज उर्फ शानू पेचकस पिता मुन्नाखां उर्फ मुनव्वर 24 साल निवासी कच्ची बस्ती प्रतापगढ, अरमान उर्फ समीर उर्फ विक्की पिता सलीम खान 23 साल निवासी 37/11 गोंदशाह उज्जैन हाल मुकाम इंद्रा कॉलोनी झुग्गी बस्ती मदंसौर, धारा 302 भादवि में आजीवन कारावास व दस हजार रूपए जुर्माना एवं धारा 25, 27 आम्र्स एक्ट में 2 साल कारावास व 2000 रूपए जुर्माने से दंडित किया। इसी तरह रफीक पिता नत्थू खां 33 साल निवासी मिर्चीवाड़ा गोद दरवाजा मदंसौर, आजमलाल पिता कय््यूम लाला 36 साल निवासी अखेपूर जिला प्रतापगढ को धारा 302, 120-बी भादवि में आजीवन कारावास व 10000 रूपए जुर्माने से दंडित किया।
पत्नी ने की थी पहचान
अनुसंधान में तथ्य सामने आया कि वीरेंद्र ठन्ना की पत्नी ने बताया की हत्या के पूर्व मोटर सायकिल पर लडके हमारे घर के आसपास कई बार चक्कर लगा रहे थे। संभवत: इन लोगों ने ही मेरे पति की हत्या की है। अनुसंधान के दौरान गिरफ्तार आरोपीगण की पहचान मृतक की पत्नी से करवाने पर उसके द्वारा घर का चक्कर लगाने वाले लड़कों की पहचान कर ली गई।
हेतु के आधार पर अपराध के दोषी नहीं
मामले में न्यायालय ने आरोपी राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह, दिलीपसिंह, रफीक, बाबु फकीर, व जमील को दोष मुक्त किया है। अभियुक्त राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह व दिलीपसिंह के अधिवक्ता केके सिंह भाटी ने न्यायालय के समक्ष तर्क प्रस्तुत किए कि कथित घटना का कारण जमीन विवाद हो सकता है। परंतु मेरे पक्षकारों का कथित घटना में आपराधिक षडयंत्र में शामिल होने के सम्बंध में अभियोजन की ओर से प्रस्तुत किए गए साक्ष्य विश्वसनीय नहीं है। केवल हेतु के आधार पर अपराध का दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इससे सहमत होकर न्यायालय ने राजेन्द्रसिंह, स्वरूपसिंह, श्यामसिंह व दिलीपसिंह दोष मुक्त किया। इसी पर शेष तीन आरोपी रफीक, बाबु फकीर, व जमील को भी दोष मुक्त किया गया।
एमपीसिंह परिहार ने की थी विवेचना
इधर, मामले में पुलिस की विवेचना भी प्रशंसनीय है। उक्त प्रकरण को गम्भीरता से लेते हुए तत्कालीन एसपी मनोजकुमार सिंह ने इसे चिन्हित सनसनीखेज अपराधों की श्रेणी में शामिल किया।
इसी तरह मामले में विवेचक तत्कालीन शहर निरीक्षक एमपी सिंह परिहार ने उत्कृष्ट विवेचना कर आरोपियों को गिरफ्तार किया व मामले में 15 मार्च 16 को न्यायालय में चालान पेश किया। विचारण के दौरान साक्षियों के कथन न्यायालय में करवाये व ठोस दस्तावेजी एवं भौतिक साक्ष्यों को एकत्रित कर न्यायालय में प्रस्तुत किए। अभियोजन साक्ष्य के दौरान निरीक्षक विनोदसिंह कुशवाह ने भी समय-समय पर सराहनीय योगदान दिया।

patallok

Related Posts

leave a comment

Create Account



Log In Your Account