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महिला दिवस पर 6 महिलाओं का सम्मान

मन्दसौर। महिला संघ, मंदसौर द्वारा महिला दिवस के उपलक्ष्य पर गुरूवार को समाज में उल्लेखनीय कार्य करने वाली महिलाओं का सम्मान किया गया।
इस अवसर पर संबोधित करते हुए लायंस क्लब अध्यक्ष मनीषा सोनी ने कहा कि जहां एक नारी की पूजा होती है वहीं देवता निवास करता है। लायंस सचिव सरिता जैन ने कहा कि महिलाओं को अधिकार दिलाने के लिये अथक प्रयास किया जाना चाहिए। रेखा रातडिय़ा ने कहा कि सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक तरक्की दिलाना ही महिलाओं को याद करने का दिन है। शिक्षिका ज्योति चौहान ने कहा कि महिला को ईश्वर से भी बढ़कर माना गया है। दिप्ती शर्मा ने महिलाओं को हर क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिये प्रेरित किया। सुधा शर्मा ने कहा कि महिलाएं किसी से कम नहीं है। वह पुरूषों के कंधे से कंधा मिलाकर अनेक क्षेत्रों में कार्य कर रही है। बसंती मसीह ने कहा कि महिलाएं राजनैतिक व अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है।
महिला संघ की ओर से सम्मानित 6 महिलाओं मनीषा सोनी, सरिता जैन, रेखा रातडिय़ा, ज्योति चौहान, सुधा शर्मा, दिप्ती शर्मा को मोमेंटो प्रदान किया। इस अवसर पर श्वेता सिंह, श्वेता शर्मा, कृतिका, करिमा लखमा, सुषमा द्विवेदी, तरूणा शर्मा, टीना मालवीय, कृति राठौर, आलिया, साक्षी, पूजा व्यास, अनामिका सहित अनेक महिलाएं उपस्थित थी। संचालन बसंती मसीह ने किया एवं आभार रेखा रातडिय़ा ने माना।
प्रसंगवश -कालिदास प्रसंग
साहित्य और कला की अद्भूत चित्र प्रदर्शनी मंदसौर में लगी

मंदसौर। कवि कुलगुरु महाकवि कालिदास का संबंध देश के विभिन्न अंचलों के साथ दशपुर (मंदसौर) और उज्जयिनी (उज्जैन) से भी गहरा रहा है। स्वयं महाकवि कालिदास ने अपने सृजन – साहित्य में कई स्तरों पर प्रमुखता से उल्लेखित किया है।
साहित्य सृजन में अंर्तराष्ट्रीय स्तर पर सराहे गए कालीदास की तुलना विश्व मानकों में अग्रणी मानी जाती है। विश्व की अनेक भाषाओं में उनके साहित्य का अनुवाद और मंचन हुआ है और निरन्तर जारी है।
इसी कड़ी में मालवा अंचल वासियों का सौभाग्य है कि नाट्य मंच, नृत्य-व्याख्यान और चित्र प्रदर्शनी के माध्यम से शोधार्थियों-युवाओं और सुधीजनों को मंदसौर में कालिदास प्रसंग से लाभ मिल रहा है। लगातार छठे वर्ष आयोजित यह प्रसंग विशेष बन पड़ा है। महाकवि कालिदास के साहित्य से अनुप्रेरित देश के वरिष्ठ रचनाकर्मी कलाकारों द्वारा सातों विधाओं पर आधारित चित्रों की प्रदर्शनी मंदसौर के पशुपतिनाथ मंदिर सभागार में लगाई गई है, जो शुक्रवार 8 मार्च तक सबके लिए खुली रहेगी।
कालिदास संस्कृत अकादमी, उज्जैन के कार्यक्रम अधिकारी अनिल बारोद ने बताया कि प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर क्षेत्रीय आधार पर कालिदास प्रसंग के कार्यक्रम होते हैं परन्तु सिफऱ् मंदसौर में ही विशेष चित्र प्रदर्शनी लगाई जाती है। गतवर्ष बिहार के मिथिलांचल की मधुबनी चित्रकला केंद्रित चित्र प्रदर्शनी लगी जिसे भरपूर सराहना मिली थी। इस वर्ष उत्साहित होकर कालिदास के सम्पूर्ण साहित्य पर केंद्रित चुनिंदा चित्र यहां सजाये गए हैं। आकर्षण का केन्द्र बनी चित्र प्रदर्शनी में कुल 36 चयनित पेंटिंग्स हैं। इनमें रघुवंशम, कुमारसम्भवम, अभिज्ञानशाकुन्तलम, ऋतुसंहारम, मेघदूतम, विक्रमो वर्षीयम, मालविकाग्निमित्रम की रचनाओं में विभिन्न रितुओं का चित्रण किया है।
डॉ घनश्याम बटवाल
लेखक एक वरिष्ठ पत्रकार है

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