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नमन उन महिलाओं को जो दर्दमंदों की हमदर्द बनीं

विशेष/आज विश्व महिला दिवस पर पालो द्वारा दूसरों के दर्द की हमदर्द बनी कुछ महिलाओं की दास्तां
पालो रिपोर्टर = मंदसौर

परदर्द की पीड़ा को अनुभव करना फिर उसके निवारण के लिये प्रयत्नशील हो जाने का नाम ही मानवता है। सहानुभूति एवं संबेदना पूर्ण जीवन ही मानव जीवन की सार्थकता है, किंतु यह बेहद कठिन है। आज व्यक्ति दूसरों के दर्द में खुशियों की खोज करता है, वहीं जिले की कुछ महिलाएं ऐसी है जिन्होंने दूसरों के दर्द में हमदर्द बनकर उसके निवारण के प्रयास किये है।
सुवासरा निवासी शिक्षिका टीना सोनी अपने क्षेत्र के बच्चों को शिक्षा के साथ साथ सदाचार और संस्कारों की शिक्षा भी देती है। सामाजिक कुरीतियों की खिलाफत के लिये बच्चों को प्रेरित करतीं है। बालिकाओं को यौन शोषण से बचाव के लिये ‘चुप न रहें मां से कहेंÓ कैम्पेन चलाकर बालिकाओं को जागरूक करने का प्रयास कर रहीं है। बाल विवाह एवं बालिका शिक्षा के लिये भी उनके द्वारा उल्लेखनीय प्रयास किया जा रहा है। गरीब एवं उपेक्षित बच्चों को उनके द्वारा नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है। घरेलू हिंसा एवं अन्य प्रकारों से पीडि़त महिलाओं के सहयोग के लिये सदैव तत्पर रहना उनका स्वभाविक गुण बन चुका है।
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में पिपलिया कराडिय़ा निवासी उषा सोलंकी के द्वारा विशेष उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने महिला एवं बाल विकास विभाग एवं ग्रामीण स्वरोजगार संस्थान के समन्वय से 30 युवतियों को सुरक्षा गार्ड की ट्रेनिंग दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह किया। बांछड़ा समुदाय की महिलाओं को सिलाई प्रशिक्षण में भी सराहनीय योगदान दिया। इसके साथ ही 21 महिलाओं का समूह बनाकर पशुपतिनाथ भोजनशाला का कार्य प्रारंभ किया। घरेलू हिंसा के अनेक प्रकरणों में महिलाओं को न्याय दिलाने के लिये सभी आवश्यक प्रयास किये।

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