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कैसे जीते हैं भला हमसे सीखों ये अदा…

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जुनून जज्बात करुणा भक्ति आस्था और सूफियाना अंदाज की मिट्टी मिक्स करके ऊपर वाला बहुत कम लोगों को बनाता है और अगर किसी को बना भी दे तो उसे होटल लाइन में नहीं डालता लेकिन राधा कृष्ण भोजनालय जो आरके के नाम से फेमस है के गले पर बैठे या किचन में तड़का लगाते दिखने वाले शख्स गोपाल गुप्ता में यह सभी खासियत है मौजूद है कोई फकीर हो या साधू भीखारी हो या कोई गरीब उनकी दुकान से खाली पेट नहीं जाता। अपनी हर तरक्की या सफलता का श्रेय वे आसमानी ताकत को देते हैं फिर वो चाहे भोलेनाथ की तस्वीर की शक्ल में हो या बालाजी की मूरत के रूप में या किसी फकीर की लोबान की धूप में गोपाल भाई के बिजनेस के सफर की शुरुआत अपने पिता श्री राम प्रसाद गुप्ता के साथ ही हो गई थी जो 80 के दशक में सरकारी बाजार रोड पर रेस्टोरेंट चलाते हुए अपने चाय समोसे और लड्डू के लिए प्रसिद्ध थे लेकिन गोपाल भाई को अपना खुद का नाम कमाना था अपने दमखम और अपने ही तौर तरीकों से इसलिए वे एसपी ऑफिस के सामने चाय का ठेला लेकर खड़े हो गए फकीरी में भी उनका अंदाज बादशाह वाला ही था ऐसे ही एक साधु को रोज चाय नाश्ता कराते कराते उसी ने कहा कि तू रोटी की दुकान लगा तू सबको रोटी खिलाएगा।

गोपाल भाई बताते हैं कि वायडी नगर के बालाजी के आशीर्वाद और भाई मनोज गुप्ता के सहयोग से उन्होंने श्री कृष्ण भोजनालय की शुरुआत कीजहाँ उनके सहित सिर्फ 2 वर्कर थे तत्कालीन एसपी श्री विजय कटारिया ने भी उनकी 4डी नगर वाले बालाजी की मन्नत पूरी करने की शक्ति को माना था और मंदिर पर कलश चढ़ाते हुए उनका हाथ भी लगवाया था। 8 अप्रैल 2001 में वर्तमान राधा कृष्ण की शुरुआत हनुमान जयंती के दिन हुई और तब से वे अपने धन्दे के शहंशाह हैं जैसे जैसे बिजनेस बढ़ा गोपाल गुप्ता का दिल भी बड़ा होता गया कभी किसी गरीब बहन की शादी तो कभी किसी बेरोजगार को रोजगार से लगाया कभी किसी बुजुर्ग की लाठी बने तो कभी किसी बच्चे की पढ़ाई का खर्चा उठाया और ये सब वे करते हैं खामोशी के साथ और ऐसे ही कार्यों के लिए उन्हे पौरवाल समाज और वैश्य महासभा सम्मानित भी कर चुकी है।
गोपाल गुप्ता भविष्य में एक चौथाई कीमत में अच्छी क्वालिटी का भोजन उपलब्ध करवा कर इस धन्दे के मठाधीशों को चौंकाने और आम आदमी को खुश करने का काम करने वाले हें उनका यह भरोसा और पुख्ता हो जाता है जब हर शाम गोधूलि बेला पर एक गाय माता अपने खुर उनकी सीढिय़ों पर रखती है जिसे वे गुड़ और घी की रोटी खिलाते हैं।

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