चौपाल से भोपाल तक अफसरशाही के गड्ढों में फंसते है शिकायत करने वाले


मंदसौर। चौपाल से लेकर भोपाल तक लिखित रूप से अवैध निर्माण को लेकर सूचित करने पर सूचनाकर्ता (आवेदक) को ही किया गया आर्थिक एवं मानसिक रूप से दंडित। दुला पिता बालू जी जाति बलाई निवासी बापचा की गलती यह थी कि उसने शिकायत की लिहाज अफसरशाही की गाज उसी पर गिरी। सूचनाकर्ता को ही संबंधितों द्वारा किया गया मानसिक एवं आर्थिक रूप से दंडित किया गया।
हुआ यूं कि दुला पिता बालू जी जाति बलाई निवासी बापचा एवं अनावेदक सूरजमल पिता गांगा जी अध्यापक प्राथमिक विद्यालय जिया खेड़ी, निवासी बापचा, तहसील बड़ौद, जिला आगर मध्य प्रदेश के होकर दोनों के मकान के मध्य एक आम रास्ता निकला हुआ है। जिसको ग्राम पंचायत बापचा, जनपद पंचायत बड़ोद, जिला पंचायत आगर द्वारा सीमेंट कंक्रीट का पक्का रास्ता भी बनाया गया है।
जब सूरजमल अध्यापक प्राथमिक विद्यालय जिया खेड़ी द्वारा अपने अवैध भवन निर्माण के समय पड़ोसियों एवं ग्राम वासियों द्वारा समझाइश देने उपरांत भी आम रास्ते पर बलपूर्वक अवैध अतिक्रमण कर पक्की पानी निकासी की नाली पर भवन की दीवार बनाकर अपने मकान का अवैध रूप से निर्माण पूर्ण कर लिया गया।
जबकि वास्तु स्थिति से संबंधितों को लिखित आवेदन देकर निर्माण पूर्व अवगत करवाने वाले आवेदक को ही आर्थिक एवं मानसिक रूप से जबरन प्रताडि़त कर संबंधितों द्वारा परेशान किया जा रहा है। ना कि अवैध निर्माणकर्ता पर कोई कार्रवाई की जा रही है। ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत, तहसीलदार, एसडीएम, थाना प्रभारी पुलिस थाना तहसील बड़ौद, जिला पंचायत, जिला पुलिस अधीक्षक, जिला कलेक्टर जिला आगर एवं मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश शासन भोपाल तक क्रमबद्ध रूप से लिखित आवेदन देकर अवगत करवाया गया जिसके पुख्ता प्रमाण मौजूद है।
इसके उपरांत भी समस्या का समाधान तो नहीं हुआ और ना ही अवैध निर्माणकर्ता पर कोई कार्यवाही हुई लेकिन संबंधितों द्वारा उल्टा 42 वर्ष पूर्व पटवारी हल्का नंबर 2 और वर्तमान में जिसका हल्का नंबर 3 है। शासन द्वारा भूमि विहिन जरूरतमंदों को दिए गए पट्टे वितरण में से एक पट्टा धारी आवेदक भी है जिसको आर्थिक एवं मानसिक रूप से प्रताडि़त कर दंडित जरूर किया गया।
इसी क्रम में तहसील कार्यालय बड़ोद द्वारा गांव में बसी बस्ती के बीचों बीच रहने वाले आवेदक दूल्हा पिता बालू को असंवैधानिक रूप से नोटिस जारी कर 10,000 रू. के अर्थदंड से दंडित किया गया व तहसील कार्यालय बुलाकर तहसीलदार द्वारा कहा गया कि 10,000 रू. की रसीद बनवा लें वरना तेरा मकान ध्वस्त कर दिया जाएगा और तुझे वहां से बेदखल कर दिया जाएगा।
जब आवेदक ने जानना चाहा कि साहब बस्ती के बीचों बीच मेरे अकेले के मकान को कैसे गिराया जा सकता है। शासन द्वारा 21/09/1981 को बड़ोद तहसील के पटवारी हल्का नंबर 2 में जिसका वर्तमान में हल्का नंबर 3 है। हमारे गांव में तकरीबन 50 से अधिक पट्टे वितरित गए थे, जिसमें 30 बाय 30 का एक पट्टा स्वयं आवेदक का भी है और सभी पट्टा धारियों ने अपने अपने भवन निर्माण कर लिए हैं। जिस पर तहसीलदार द्वारा कहा गया कि जैसा हम कहते हैं वैसा कर और तेरे द्वारा जो शिकायते कि गई उसको वापस ले लेना।
इस प्रकार जबरन आवेदक को तहसील कार्यालय में बिठाकर दबाव बनाकर 181 की शिकायत वापस करवाई गई और जबरन 10,000 रू. लेकर तहसील कार्यालय से रसीद काट दी गई।
जबकि अवैध निर्माणकर्ता सूरजमल अध्यापक प्राथमिक विद्यालय जिया खेड़ी पर कार्यवाही तो कोसों दूर उल्टा अवैध निर्माण की सूचनाकर्ता को ही मानसिक एवं आर्थिक रूप से जबरन प्रताडि़त प्रताडि़त किया जा रहा है।
अत: उपरोक्त मामले की गऱ पुुन: उचित एवं न्यायोचित जांच एवं दोषियों पर वैधानिक कार्यवाही हो तो आवेदक फिर अवैध निर्माणकर्ता एवं मामले में लिप्त दोषियों के कहर का ना हो शिकार।