काला भाटा पिकनिक स्पॉट की फाइल कर रही है निकम्मे विभागो की परिक्रमा


मंदसौर। शिवना नदी पर बने काला भाटा बांध के पास खाली पड़ी भूमि पर पिकनिक स्पॉट की योजना तैयार की गई थी। फाईल नगरपाकिा और तहसील कार्यालय के चक्कर काटती रही। इसके बाद लंबे समय तक फाइल वाटर वक्र्स में धूल खाती रही। अब फाईल और योजना न जाने कहा चली गई? कुल मिलाकर कालाभाटा पिकनिक स्पॉट योजना भी एक और जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के हथेली पर चांद दिखाने वाले सपनों का उदाहरण है। सबसे बड़ी बात यह है कि शासन ने इस पिकनिक स्पॉट के लिए दो करोड़ से ज्यादा रुपए भी स्वीकृत कर दिए थे।
कालाभाटा बांध के आसपास शासकीय भूमि को पिकनिक स्पॉट के रूप में विकसित करने के लिए छह साल पहले नपा ने तत्कालीन कलेक्टर शशांक मिश्र को आवेदन दिया था। इसके बाद ग्राम पंचायत खिलचीपुरा ने आपत्ति ली थी। वर्ष 2014 में ही ग्रापं खिलचीपुरा की आपत्ति का निराकरण हो गया। बाद में लंबे समय तक हस्तांतरण की प्रक्रिया चलती रही। 2015 से कई बार संशोधन के लिए फाइल तहसील कार्यालय से नपा व फिर नपा से तहसील कार्यालय पहुंची लेकिन जमीन हस्तांतरण नहीं हो पाया। बाद में लंबे समय तक जमीन आवंटन की फाइल रामघाट स्थित वाटर वर्क्स पर धूल खाती रही। अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन भी नपा नक किया। वहां से जमीन का आवंटन करवाने में नपा को पसीने आ गए। यह योजना नपा की पिछली परिषद में बनी थी। इसके बाद एक और परिषद ने अपना कार्यकाल पूरा कर लिया। बाद में कलेक्टर ने प्रशासक के रूप में नपा की बागडौर संभाली। लेकिन न फाइल के पते हैं और न ही योजना के।
अमृत योजना में राशि भी स्वीकृत हुई थी
कालाभाटा बांध के समीप पिकनिक स्पॉट के लिए शासन ने वर्ष 2016 में 2.13 करोड़ रुपए स्वीकृत कर केन्द्र सरकार की वाप्कोस लिमिटेड कम्पनी को नियुक्त कर दिया लेकिन कालाभाटा पर जमीन नहीं मिलने के कारण सर्वे नहीं हो पाया। बाद में इस राशि से दादा-दादी पार्क बनाने के लिए शासन को प्रपोजल भेजा गया था।
यह थी योजना
तेलिया तालाब पिकनिक स्पॉट के बाद शहर में सज्जित पिकनिक स्पॉट की जरूरत महसूस हो रही है। कालाभाटा पर आकर्षक फूलवारी, हट्स, रेस्टोरेंट, झूला-चकरी सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना तैयार की गई थी। फोरलेन के समीप स्थित जगह पर एक ओर भरपूर पानी और खुला प्राकृतिक शुद्घ वातावरण लोगों को मिल सकता था।
पिकनिक स्पॉट के नाम पर कर दिए लाखों खर्च
नगर पालिका बरसों पहले रेवास-देवड़ा रोड पर तैलिया तालाब के किनारे ऋषियानंद बगीचा विकसित किया था।यहां फव्वारें लगाए थे। बकायदा दो कुटिया बनाई थी। पाथ का निर्माण किया था। पुष्पित सुगंधित पौधे लगाए थे।मंहगी घास का रोपण भी किया।बगीचे की सुरक्षा के लिए चार दिवारी बनाई।माली रखे गए। लोग भी शहर से थोड़ा दूर आकर परिवार के साथ मनोरंजन के लिए समय बीताने लगे। रखरखाव का अभाव नपा कर्मियों की लापरवाही के चलते यह बगीचा उजड़ गया। अब यहां ना फव्वारे चलते है ना ही सुंदर आकर्षक रोशनी है। अब लोग भी यहां नहीं आते है। यह बात और है कि इस बगीचे के निर्माण में नगर पालिका ने लाखों रूपए खर्च किए। पर इसका फायदा ज्यादा समय तक लोगों को नहीं मिला।
तैलिया तालाब पर भी कर दिए लाखों खर्च, स्थिति में नहीं अधिक सुधार
कुछ अरसे पहले रामटेकरी क्षेत्र में तैलिया तालाब के किनारे पिकनिक स्पॉट डेवलप किया गया। यहां पर्यटन विकास की मदद से घाट बनवाया गया। छतरियां लगवाई। पैवर ब्लॉक लगवाएं। बगीचा विकसित किया। आकर्षक रोशनी व्यवस्था की।पर यहां भी आए दिन रोशनी गायब हो जाती है। बच्चों के लिए झूल चकरी टूटे हुए मिलते है। असामाजिक तत्वों का जमावड़ा भी आसपास बना रहता है। ना तो यहां सुंदर सुगंधित पौधे लगे है और ना ही आकर्षक बगीचा। पर्यटन विकास निगम से तालाब में बोट चलाने के लिए तीन पैडल वोट ली। बकायदा विधायक से उद्घाटन करवाया। एक से दो दिन तक तालाब में सैर भी करवाई। सुरक्षा कारणों का हवाला देकर बोट बंद कर दी। अब यह पैडल वोट अटाला बनी हुई है।